यूपी में 30 से 40 लाख तक पहुंच सकता है शिक्षक वोट बैंक, 2027 चुनाव से पहले सभी दलों की नजरें इस बड़े वर्ग पर
उत्तर प्रदेश की सियासत में हर बड़ा सामाजिक वर्ग चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता है। लेकिन शिक्षकों का प्रभाव सिर्फ उनकी संख्या तक सीमित नहीं है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में शिक्षक समाज के प्रभावशाली वर्गों में गिने जाते हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में शिक्षक वोट बैंक को साधना किसी भी राजनीतिक दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पिछले कुछ महीनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। कैशलेस इलाज, दुर्घटना बीमा, मानदेय में बढ़ोतरी, अलग TET परीक्षा और नई शिक्षक भर्ती जैसे फैसलों को राजनीतिक नजरिए से सरकार का बड़ा ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जा रहा है। हालांकि, पुरानी पेंशन और नियमितीकरण जैसे मुद्दे अब भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
यूपी में कितना बड़ा है शिक्षक वोट बैंक?
उत्तर प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों से जुड़े शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या काफी बड़ी है। आंकड़ों के अनुसार, बेसिक शिक्षा परिषद के तहत करीब 5 से 6 लाख नियमित शिक्षक कार्यरत हैं। इसके अलावा लगभग 1.5 लाख शिक्षामित्र और करीब 25 हजार अंशकालिक अनुदेशक भी शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।
राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की संख्या भी लगभग 2 से 2.5 लाख के बीच बताई जाती है। यदि नियमित शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और उनके परिवारों को जोड़कर देखा जाए तो यह प्रभाव 30 से 40 लाख वोटों तक पहुंच सकता है।
शिक्षकों का प्रभाव केवल उनके अपने वोट तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण इलाकों में शिक्षक आज भी सामाजिक रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं और चुनाव के दौरान उनकी राय का असर कई मतदाताओं पर पड़ सकता है। चुनावी ड्यूटी और मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कामों में भी शिक्षकों की बड़ी भूमिका होती है। यही वजह है कि राजनीतिक दल शिक्षक समुदाय की नाराजगी को नजरअंदाज नहीं करना चाहते।
योगी सरकार ने शिक्षकों को दीं कौन-कौन सी सौगातें?
1. कैशलेस इलाज की बड़ी योजना
योगी सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू की है। इसके तहत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों समेत बड़ी संख्या में लाभार्थियों को परिवार के लिए सालाना 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने का प्रावधान बताया गया है। इस योजना का प्रीमियम सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
यह सुविधा शिक्षकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि स्वास्थ्य से जुड़े बड़े खर्चों का बोझ सीधे परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। ऐसे में कैशलेस इलाज की सुविधा से बड़ी संख्या में शिक्षक परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
2. एक करोड़ रुपये तक का दुर्घटना बीमा
सरकार ने शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ मिलकर दुर्घटना बीमा सुविधा का भी ऐलान किया है। नियमित शिक्षकों के परिवारों को दुर्घटना की स्थिति में 1 करोड़ रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर देने की बात कही गई है।
वहीं, संविदा पर काम करने वाले शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के लिए भी अलग-अलग श्रेणियों में लाखों रुपये का बीमा कवर तय किया गया है। सरकार के इस फैसले को शिक्षकों की आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
3. अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी
अंशकालिक अनुदेशकों के लिए भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उनका मासिक मानदेय 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया गया है। बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अनुदेशकों के मानदेय को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद सरकार की ओर से मानदेय बढ़ाने का फैसला लिया गया।




