एबीवीपी कार्यकर्ता से शुरू हुआ विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर
विनोद तावड़े ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी के कार्यकर्ता के तौर पर की। संगठन में काम करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे बीजेपी की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
आरएसएस और एबीवीपी से जुड़े रहने के कारण तावड़े को संगठनात्मक राजनीति का लंबा अनुभव मिला। आगे चलकर उन्होंने महाराष्ट्र बीजेपी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और पार्टी के मजबूत संगठनकर्ताओं में अपनी जगह बनाई।
महाराष्ट्र बीजेपी में बढ़ा विनोद तावड़े का कद
विनोद तावड़े ने महाराष्ट्र बीजेपी में संगठन से जुड़ी कई जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बाद वह मुंबई बीजेपी अध्यक्ष और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी बने।
2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बोरीवली सीट से जीत दर्ज करने के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा और संस्कृति समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
2019 में टिकट कटने से लगा बड़ा झटका
विनोद तावड़े के राजनीतिक करियर में साल 2019 एक बड़ा मोड़ लेकर आया। बीजेपी ने उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्हें सक्रिय चुनावी राजनीति से साइडलाइन किए जाने की चर्चा शुरू हुई।
हालांकि, तावड़े ने संगठन में अपनी सक्रियता बनाए रखी और पार्टी के भीतर काम करते रहे। यही संगठनात्मक अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक कमबैक का आधार बना।
संगठन के रास्ते राष्ट्रीय राजनीति में हुआ कमबैक
विनोद तावड़े को बाद में बीजेपी में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियां मिलीं। राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद उन्होंने अलग-अलग राज्यों में पार्टी संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े काम संभाले।
हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों की जिम्मेदारी संभालते हुए तावड़े ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत की। इसी दौरान पार्टी नेतृत्व के बीच उनका प्रभाव और भरोसा बढ़ता गया।
बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी
बीजेपी ने अब विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक राज्य माना जाता है और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह जिम्मेदारी बेहद अहम है।
तावड़े के सामने यूपी में पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की रणनीति को जमीन पर लागू करने की चुनौती होगी।
छह साल बाद बड़ी जिम्मेदारी के साथ वापसी
2019 में विधानसभा टिकट नहीं मिलने के बाद विनोद तावड़े ने संगठन के रास्ते अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाया। अब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी मिलना उनके राजनीतिक कमबैक का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
एबीवीपी के कार्यकर्ता से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और अब यूपी प्रभारी बनने तक तावड़े का सफर संगठनात्मक राजनीति में उनकी लंबी पारी को दिखाता है।
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