स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 भारत का पहला निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जो छोटे सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचाने के साथ देश के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को नई दिशा देगा।
भारत अब अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस ने देश के पहले निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 को लॉन्च के लिए तैयार कर लिया है। यह रॉकेट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के श्रीहरिकोटा लॉन्च पैड से उड़ान भरने के लिए तैयार है।
स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, विक्रम-1 का लॉन्च मिशन "मिशन आगमन" नाम दिया गया है। इससे पहले कंपनी ने साल 2022 में विक्रम-एस नामक सबऑर्बिटल रॉकेट का सफल परीक्षण किया था।
विक्रम-1 रॉकेट की क्या हैं खूबियां?
विक्रम-1 को खास तौर पर छोटे और मध्यम आकार के सैटेलाइट को अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
इसकी प्रमुख विशेषताएं:
विक्रम-1 की अधिकतम पेलोड क्षमता करीब 500 किलोग्राम है।
शुरुआती लॉन्च में यह लगभग 350 किलोग्राम वजन के सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाएगा।
यह करीब 260 किलोग्राम पेलोड को सन सिंक्रोनस ऑर्बिट तक ले जाने में सक्षम है।
यह रॉकेट लगभग 500 किलोमीटर ऊंचाई तक सैटेलाइट पहुंचा सकता है।
कंपनी के अनुसार, विक्रम-1 का वजन लगभग 40 टन है और इसकी ऊंचाई करीब 20 मीटर है। यह करीब 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से सैटेलाइट को अंतरिक्ष तक पहुंचाने की क्षमता रखता है।
एडवांस तकनीक से बना है विक्रम-1
स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। इसका 3D प्रिंटेड लिक्विड इंजन पारंपरिक इंजन की तुलना में करीब 50 प्रतिशत हल्का बताया जा रहा है।
इसके अलावा रॉकेट में कार्बन फाइबर से बने कार्बन कंपोजिट स्ट्रक्चर का उपयोग किया गया है, जिससे इसका वजन कम और मजबूती अधिक होती है।
विक्रम-1 का डायमीटर करीब 1.7 मीटर है और इसकी थ्रस्ट क्षमता लगभग 1200 किलोन्यूटन है।
विक्रम-1 का नाम क्यों रखा गया?
स्काईरूट एयरोस्पेस ने इस लॉन्च व्हीकल का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा है।
कंपनी के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने साल 2018 में स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना की थी।
2022 में विक्रम-एस की सफलता
स्काईरूट ने 18 नवंबर 2022 को विक्रम-एस रॉकेट लॉन्च किया था। यह भारत की किसी निजी कंपनी द्वारा लॉन्च किया गया पहला रॉकेट था।
विक्रम-एस ने लगभग 88.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी थी। इसमें तीन पेलोड भेजे गए थे, जिनमें स्पेस किड्ज इंडिया और अन्य कंपनियों के पेलोड शामिल थे।




