उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, पांच साल में बंद हुए 826 स्कूल
उत्तराखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य में 826 सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद हो चुके हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। यह जानकारी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दी।
यह मुद्दा उस समय और अधिक चर्चा में आया जब सत्तारूढ़ दल के ही विधायक महेश जीना ने शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर अपनी ही सरकार से कई तीखे सवाल पूछे।
छात्र संख्या घटने से बंद हुए स्कूल
शिक्षा मंत्री के अनुसार राज्य में वर्तमान में 10,940 सरकारी प्राइमरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। हालांकि वर्ष 2020 के बाद से कई स्कूलों में छात्र संख्या शून्य होने के कारण 826 प्राइमरी स्कूलों को बंद करना पड़ा।
इनमें सबसे अधिक स्कूल टिहरी जिले में बंद हुए हैं, जहां 262 प्राइमरी स्कूलों पर ताले लग चुके हैं। इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल, चमोली, देहरादून और अन्य जिलों में भी कई स्कूल बंद हो चुके हैं।
कई स्कूलों की हालत जर्जर
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तरकाशी जिले में 43 स्कूल जर्जर हालत में हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश स्कूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए बजट स्वीकृत किया जा चुका है।
विधायक ने उठाए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
सल्ट से भाजपा विधायक महेश जीना ने विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में माध्यमिक शिक्षा के तहत 37 इंटर कॉलेज और 22 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।
इन 59 स्कूलों में से 37 स्कूलों में प्रधानाचार्य के पद खाली हैं। इसके अलावा प्रवक्ता और एलटी शिक्षकों के 243 पद रिक्त हैं, जिनमें से कई पदों पर फिलहाल अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं।
प्राथमिक स्कूलों की स्थिति भी चिंताजनक
प्राथमिक स्कूलों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। कई जगहों पर भवन जर्जर होने के कारण स्कूलों को दूसरे भवनों में संचालित करना पड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर खटोली का एक प्राथमिक विद्यालय जर्जर होने के कारण वन विभाग के भवन में चलाया जा रहा है।
माध्यमिक स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी
शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े एक सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में 516 शिक्षकों का तबादला किया गया है। इनमें कुछ ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं जिनके विषय में छात्रों की संख्या शून्य हो गई थी।
इसके अलावा राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में 4745 प्रवक्ता शिक्षकों के पद अभी भी खाली हैं। इनमें से 808 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, जबकि 3937 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया लोक सेवा अधिकरण में लंबित है।




