अमेरिका का रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का नया प्लान, तेल और गैस खरीदने वाले देश भी निशाने पर।
वॉशिंगटन। रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने ऐसे विधेयक (बिल) को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत रूस से तेल, गैस और अन्य निर्यातित वस्तुएं खरीदने वाले देशों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय को कम करना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
यदि यह विधेयक आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी कर कानून बनता है, तो रूस के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखने वाले कई देशों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ सकता है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है अमेरिकी सीनेट का नया प्रस्ताव?
अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य केवल रूस पर सीधे प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि उन देशों और कंपनियों पर भी कार्रवाई करना है जो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस या अन्य प्रमुख निर्यातित वस्तुओं की खरीद जारी रखते हैं।
प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि रूस की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात पर निर्भर है। ऐसे में यदि उसकी ऊर्जा बिक्री कम होती है तो उस पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा।
किन देशों पर पड़ सकता है असर?
यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो रूस से ऊर्जा आयात करने वाले कई देशों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम कानून में किन देशों या किन परिस्थितियों में प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रतिबंध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर डाल सकते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी सख्ती
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस पर कई दौर के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें बैंकिंग, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिबंध शामिल हैं।
अब अमेरिकी सीनेट का यह नया प्रस्ताव रूस के ऊर्जा निर्यात को और अधिक सीमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




