अमेरिकी हमले में चाबहार पोर्ट का टावर तबाह, भारत के रणनीतिक हितों पर बढ़ा बड़ा खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष का असर अब चाबहार बंदरगाह तक पहुंच गया है। ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट पर लगातार हुए अमेरिकी हमलों के बाद यहां बना मैरिटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस टावर को निशाना बनाने के लिए अमेरिका ने तीन बार हमले किए। पहली कार्रवाई 8 जुलाई को हुई, इसके बाद 15 जुलाई को दोबारा हमला किया गया और 16 जुलाई की रात हुए भीषण हमले के बाद टावर पूरी तरह गिर गया।
चाबहार बंदरगाह ईरान के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर हिंद महासागर तक पहुंच का प्रमुख समुद्री रास्ता है। ऐसे में यहां के मैरिटाइम ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम के तबाह होने से जहाजों की आवाजाही और समुद्री नेविगेशन प्रभावित होने की आशंका है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में बंदरगाह के दो समुद्री पियर्स को भी नुकसान पहुंचा है, जिनमें शाहिद बेहेश्ती डॉक भी शामिल है।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी चिंता भारत के लिए है। चाबहार पोर्ट भारत की रणनीतिक विदेश नीति और व्यापारिक योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत ने इस परियोजना में लगभग 120 मिलियन डॉलर यानी करीब साढ़े 11 अरब रुपये का निवेश किया है। भारत की कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मई 2024 में भारत और ईरान के बीच 10 साल का ऑपरेशनल समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत चाबहार बंदरगाह के विकास और संचालन में भारत की भूमिका और बढ़ी। भारत के लिए यह बंदरगाह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच बनाई जा सकती है।
चाबहार बंदरगाह भारत की इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC योजना से भी जुड़ा हुआ है। यह लगभग 7,200 किलोमीटर लंबा व्यापारिक मार्ग भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों को जोड़ने की योजना का हिस्सा है। इस मार्ग के जरिए भारत से रूस और यूरोप तक सामान पहुंचाने में समय और लागत कम करने का लक्ष्य है।




