UPI पर MDR लागू करने की चर्चा तेज, जानें क्यों बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इसकी जरूरत महसूस हो रही है और आम ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लॉन्च हुए करीब एक दशक हो चुका है। शुरुआत में लोग डिजिटल पेमेंट को लेकर थोड़े हिचकिचाते थे, लेकिन समय के साथ UPI देश में भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल ने इसकी पहुंच को और मजबूत किया।
आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े मर्चेंट तक UPI के जरिए भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि, UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बैंक और फिनटेक कंपनियों पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर और साइबर सिक्योरिटी का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। इसी वजह से UPI ट्रांजेक्शन पर MDR (Merchant Discount Rate) लागू करने को लेकर बहस तेज हो गई है।
MDR क्या होता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो किसी व्यापारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और पेमेंट एग्रीगेटर लेते हैं।
सरल भाषा में समझें तो अगर कोई ग्राहक डिजिटल पेमेंट करता है, तो उस ट्रांजेक्शन को प्रोसेस करने और उससे जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को एक लागत उठानी पड़ती है। MDR इसी लागत की भरपाई का एक माध्यम हो सकता है।
क्या आम आदमी को UPI के लिए पैसे देने होंगे?
सरकार की ओर से साफ किया गया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। यानी ग्राहक को UPI से पेमेंट करने पर सीधे तौर पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में MDR को लेकर स्पष्ट किया है कि यदि शुल्क लागू किया जाता है, तो इसका असर व्यापारियों पर होगा, न कि आम UPI यूजर्स पर।
MDR लागू करने के पीछे क्या तर्क है?
सरकार और इंडस्ट्री के एक वर्ग का तर्क है कि UPI ट्रांजेक्शन की संख्या लगातार बढ़ रही है। करोड़ों डिजिटल पेमेंट को संभालने के लिए बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट एग्रीगेटर्स को सर्वर, टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में लगातार निवेश करना पड़ता है।
MDR से मिलने वाला राजस्व डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत करने और भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश करने में मदद कर सकता है।
कितनी हो सकती है MDR से कमाई?
ब्रोकरेज फर्म Jefferies के अनुमान के मुताबिक, अगर 2,000 रुपये से अधिक के बड़े मर्चेंट UPI ट्रांजेक्शन पर 0.15% से 0.30% तक MDR लागू किया जाता है, तो इससे बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए बड़ी कमाई का रास्ता खुल सकता है।




