उदयपुर के 2 करोड़ रिश्वत केस में नया खुलासा
उदयपुर के चर्चित 272 भूखंड मामले से जुड़े 2 करोड़ रुपए के कथित रिश्वतकांड में SOG के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी से पूछताछ जारी है। एसीबी ने 27 सितंबर को कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन को रिश्वत लेते पकड़ा था और इसके बाद ASP मुकेश सोनी को भी हिरासत में लिया गया।
अब जांच में एक और पहलू सामने आया है। ACB के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे और उसकी पत्नी को डर था कि मुकेश सोनी उनकी निगरानी करवा रहे हैं। इसी वजह से शिकायतकर्ता ACB कार्यालय जाने से भी डर रहा था।
शिकायतकर्ता ने निगरानी का लगाया था आरोप
Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने ACB को बताया कि उसे आशंका थी कि ASP मुकेश सोनी उस पर नजर रख रहे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसी डर के कारण वह ACB कार्यालय नहीं जा पा रहा था। ये बातें शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं और मामले की जांच जारी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कथित रिश्वत की मांग पहले 1 करोड़ रुपए बताई गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए किए जाने का आरोप है। बदले में मुकदमों में राहत, दूसरे मामलों में आरोपी नहीं बनाने और घर से जब्त दस्तावेज लौटाने जैसी बातें सामने आई हैं।
iPhone को लेकर भी जांच
मामले में ASP के iPhone को लेकर भी चर्चा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ACB पूछताछ के दौरान फोन के पासवर्ड को लेकर भी सवाल सामने आए हैं और फोन से जुड़े संभावित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, फोन में वास्तव में क्या जानकारी है और उसमें से जांच एजेंसी को क्या मिला है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल फोन में “राज” होने की बात को जांच के संदर्भ में ही देखना उचित है।
ऐसे ACB के जाल में आया मामला
ACB के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया गया था। जांच में कथित मांग की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई। 27 सितंबर को सज्जन सिंह जैन को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा गया।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैप में 4 लाख रुपए असली नोट और 1.96 करोड़ रुपए डमी नोट के रूप में रखे गए थे। इसके बाद ASP मुकेश सोनी को भी हिरासत में लिया गया।
272 भूखंड मामले में राहत के नाम पर रिश्वत का आरोप
पूरा मामला उदयपुर के 272 भूखंडों से जुड़े कथित घोटाले की जांच से जुड़ा है। ACB के अनुसार, शिकायत में आरोप था कि इस मामले में आरोपियों को राहत देने, अन्य मामलों में आरोपी नहीं बनाने और जब्त दस्तावेज लौटाने के बदले 2 करोड़ रुपए की मांग की गई।



