ईरानी हमलों के बाद UAE में फंसे लोगों के लिए ‘फरिश्ता’ बने भारतीय, खोल दिए घरों के दरवाजे
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़े तनाव के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। हालात बिगड़ने के बाद कई उड़ानें रद्द हो गईं, जिसके चलते हजारों लोग UAE में फंस गए हैं। ऐसे मुश्किल समय में वहां रहने वाले भारतीय प्रवासी लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं।
भारतीय समुदाय ने जरूरतमंदों के लिए अपने घरों के दरवाजे खोल दिए हैं। कई लोग फंसे हुए यात्रियों को रहने की जगह दे रहे हैं, जबकि कई संगठन भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
ब्लड डोनेशन कैंप और हेल्पलाइन की शुरुआत
रिपोर्ट के मुताबिक, शारजाह में लंबे समय से रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्य निसार थलंगारा ने कहा कि UAE को भारतीय हमेशा अपना दूसरा घर मानते हैं और संकट के समय इस देश के साथ खड़े रहना उनकी जिम्मेदारी है।
इमरजेंसी मेडिकल जरूरतों को देखते हुए कई जगहों पर ब्लड डोनेशन कैंप भी लगाए जा रहे हैं। इन कैंपों का मकसद अस्पतालों में खून की कमी को पूरा करना और जरूरतमंद मरीजों की मदद करना है।
एयरस्पेस बंद होने से फंसे यात्रियों की मदद के लिए इंडियन पीपुल्स फोरम (IPF) ने भी हेल्पलाइन शुरू की है। इस हेल्पलाइन के जरिए वॉलंटियर्स 24 घंटे लोगों को जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध करा रहे हैं।
मजदूरों और ड्राइवरों को बांटा जा रहा इफ्तार
भारतीय कम्युनिटी ग्रुप्स रमजान के दौरान मजदूरों और गाड़ी चलाने वालों को लगातार इफ्तार बांट रहे हैं। AKCAF एसोसिएशन और एम्पावरिंग गुडनेस के वॉलंटियर्स दुबई पुलिस की मदद से रोजाना करीब 2,000 ड्राइवरों को इफ्तार का खाना दे रहे हैं।
इसी तरह मॉडल सर्विस सोसाइटी (MSS) भी दुबई और शारजाह में काम करने वाले मजदूरों को रोजाना इफ्तार उपलब्ध करा रही है। संगठन के मुताबिक, दोनों अमीरात के लेबर कैंपों में करीब 20,000 लोगों को रोजाना इफ्तार दिया जा रहा है, जिसमें महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था भी शामिल है।
UAE में बड़ी संख्या में रहते हैं भारतीय
UAE में भारतीयों की संख्या काफी ज्यादा है। साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक वहां करीब 43 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 35 प्रतिशत हैं।




