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ट्रम्प दखल से बालोगुन रेड कार्ड रद्द, फीफा फैसले पर विवाद

डोनाल्ड ट्रम्प के हस्तक्षेप के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द होने से फीफा के फैसले पर विवाद छिड़ गया और निष्पक्षता पर सवाल उठे।

Enews Bharat7 July 2026
ट्रम्प दखल से बालोगुन रेड कार्ड रद्द, फीफा फैसले पर विवाद

ट्रम्प के फोन के बाद बालोगुन का रेड कार्ड रद्द, फीफा की निष्पक्षता पर उठे सवाल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से संपर्क कर अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द करवाने का आरोप लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रम्प के हस्तक्षेप के बाद फीफा ने बालोगुन पर लगा एक मैच का प्रतिबंध हटाकर उन्हें बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल खेलने की अनुमति दे दी। इस फैसले ने FIFA World Cup के दौरान खेल प्रशासन की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।

बेल्जियम के खिलाफ खेलने की मिली अनुमति

25 वर्षीय फोलारिन बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ खेले गए नॉकआउट मुकाबले में रेड कार्ड मिला था। नियमों के मुताबिक उन्हें अगले मैच से बाहर रहना चाहिए था, लेकिन फीफा ने उनका प्रतिबंध हटाकर बेल्जियम के खिलाफ मैदान में उतरने की मंजूरी दे दी। हालांकि, बालोगुन के खेलने के बावजूद अमेरिका की टीम बेल्जियम से 1-4 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई।

ट्रम्प ने खुद स्वीकार किया हस्तक्षेप

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वीकार किया कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से इस मामले में बात की थी। ट्रम्प के मुताबिक उन्होंने फीफा से बालोगुन के एक मैच के प्रतिबंध की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। बाद में फीफा ने प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया, जिसे ट्रम्प ने सही निर्णय बताया।

फीफा ने क्या कहा?

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ उपलब्ध तथ्यों और नियमों के आधार पर फैसला लिया है। हालांकि, इस निर्णय के बाद फीफा की निष्पक्षता और राजनीतिक प्रभाव से स्वतंत्र होने के दावों पर सवाल उठने लगे हैं।

बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताया विरोध

फीफा के फैसले का बेल्जियम फुटबॉल महासंघ और यूरोपियन फुटबॉल यूनियन ने विरोध किया। बेल्जियम ने इस निर्णय के खिलाफ अपील भी दायर की, लेकिन फीफा ने उसे खारिज कर दिया।

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1962 के बाद दूसरा बड़ा मामला

विश्व कप इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने का यह दूसरा बड़ा मामला माना जा रहा है। इससे पहले 1962 विश्व कप में ब्राजील के महान खिलाड़ी गरिंचा का रेड कार्ड हटाया गया था और उन्होंने फाइनल मुकाबला खेला था। हालांकि, उस समय के नियम वर्तमान नियमों से अलग थे।

फीफा की पारदर्शिता पर बढ़ी बहस

ट्रम्प की सार्वजनिक दखलअंदाजी और उसके बाद फीफा के फैसले ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट प्रक्रिया बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक प्रभाव की आशंका न रहे।


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