टोंक जिले में बाल विवाह के खात्मे के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान का समापन
टोंक जिले में बाल विवाह की कुप्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से चलाया गया ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चल रहे 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत सिकोईडिकोन (CECOEDECON) संस्था द्वारा यह रथ यात्रा आयोजित की गई।
‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ नेटवर्क के सहयोग से चलाए गए इस अभियान को PHED कैबिनेट मंत्री कन्हैया लाल चौधरी, पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, टोंक भाजपा जिला अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह, निवाई विधायक राम सहाय वर्मा, जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल, बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक नवल खान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दिनेश कुमार जलथुरिया, निवाई एसडीओ प्रीति मीणा और पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
30 दिनों में हजारों लोगों को किया जागरूक
पिछले 30 दिनों में इस रथ ने जिले के कई गांवों और कस्बों का दौरा किया। इस दौरान हजारों लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और कानूनी दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया गया।
सिकोईडिकोन के निदेशक पी.एम. पॉल ने बताया कि यह अभियान केवल एक यात्रा नहीं बल्कि बदलाव का संदेश था। समाज अब यह समझने लगा है कि बाल विवाह कोई परंपरा नहीं बल्कि बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन और एक दंडनीय अपराध है।
तीन चरणों में चला जागरूकता अभियान
इस अभियान को तीन प्रमुख चरणों में संचालित किया गया।
पहले चरण में स्कूलों और कॉलेजों के माध्यम से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को जागरूक किया गया।
दूसरे चरण में धर्मगुरुओं, कैटरर्स, टेंट संचालकों, बैंड और घोड़ी वालों से संपर्क कर बिना आयु प्रमाण पत्र की जांच के सेवाएं न देने के लिए प्रेरित किया गया।
तीसरे चरण में ग्राम पंचायतों के सहयोग से गांव-गांव में जनभागीदारी सुनिश्चित की गई और मोटरसाइकिल तथा साइकिल कारवां के माध्यम से दूर-दराज की ढाणियों तक जागरूकता संदेश पहुंचाया गया।
कैंडल मार्च और महिला नेतृत्व को सम्मान
अभियान के अंतिम चरण में 7 मार्च को निवाई क्षेत्र के गांवों में महिलाओं के नेतृत्व में कैंडल मार्च निकाला गया, जिसने बाल विवाह के खिलाफ मजबूत संदेश दिया।
इसके बाद 8 मार्च को




