TMC नाम-सिंबल विवाद में ममता का जवाब, दोनों गुटों को झटका
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद और गहरा गया है। आगामी विधानसभा उपचुनावों से पहले चुनाव आयोग ने पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है।
चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में दोनों गुटों को ‘All India Trinamool Congress’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों से वैकल्पिक पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा है।
चुनाव आयोग ने TMC का नाम और सिंबल किया फ्रीज
चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक TMC के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी समूह सामने आए हैं। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दोनों पक्ष पार्टी और उसके चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहे हैं।
आयोग ने कहा कि मामले में अंतिम निर्णय अभी बाकी है। फिलहाल उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए जाएंगे।
दोनों गुटों को 11 बजे तक देने हैं विकल्प
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को शुक्रवार, 18 सितंबर की सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा है। इसके बाद आयोग मौजूदा उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों गुट चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित फ्री सिंबल की सूची में से विकल्प चुन सकते हैं। उन्हें चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी से जुड़ाव का संकेत देने की भी अनुमति होगी।
ममता बनर्जी ने रात में ही दिया जवाब
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी की ओर से रात में ही आयोग को जवाब सौंप दिया गया। इस तरह ममता गुट ने आयोग के निर्देश पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी।
वहीं, ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े गुट को भी निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने पसंदीदा नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प आयोग को देने हैं।
आगामी उपचुनावों पर पड़ेगा असर
चुनाव आयोग का यह अंतरिम फैसला पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों के संदर्भ में आया है। दोनों गुटों ने अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, ऐसे में चुनावी प्रक्रिया में दोनों की पहचान अलग रखने के लिए आयोग ने यह व्यवस्था की है।
रिपोर्टों के अनुसार नंदीग्राम और रेजीनगर समेत उपचुनावों को लेकर यह विवाद महत्वपूर्ण है। दोनों गुटों को अब अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ना होगा।



