तीसरे बच्चे पर चुनाव रोक, सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत नियमों पर दिखाई सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों की पात्रता से जुड़े एक अहम नियम को लेकर बड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को पंचायत सदस्य या सरपंच चुनाव लड़ने से रोकने वाले प्रावधान को बरकरार रखा है।
यह मामला महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले की काकोडा ग्राम पंचायत से जुड़ा है, जहां सरपंच पद पर चुनी गई महिला को तीसरे बच्चे के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन अदालत ने नियम में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
दो से ज्यादा बच्चों वाले नहीं लड़ सकते पंचायत चुनाव
महाराष्ट्र में लागू नियम के अनुसार, जिन लोगों के दो से अधिक बच्चे हैं, वे पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं माने जाते। इस प्रावधान का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन को बढ़ावा देना बताया जाता है।
इसी नियम के तहत काकोडा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई इंगले को तीसरे बच्चे के जन्म के बाद पद के लिए अयोग्य करार दिया गया। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- समय के साथ बदल गया है देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को लेकर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि देश की परिस्थितियां समय के साथ बदल रही हैं और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए कानूनों को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत चुनावों में योग्यता और अयोग्यता तय करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और जब तक कोई नियम संविधान के खिलाफ न हो, तब तक उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
सरपंच पद से हटाए जाने का मामला पहुंचा था अदालत
काकोडा ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई इंगले को तीसरे बच्चे के कारण पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई शुरू की थी। उनका पक्ष था कि चुनाव जीतने के बाद इस तरह अयोग्य घोषित करना उचित नहीं है।
हालांकि, अदालत ने संबंधित कानून और नियमों को देखते हुए उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया और पहले के फैसले को बरकरार रखा।




