राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने बुधवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
संगठन द्वारा यह विरोध शिक्षा विभाग के उस निर्णय के खिलाफ किया गया, जिसमें छात्रों के ग्रीष्म अवकाश और संस्था प्रधानों के अधिकृत अवकाश में कटौती की गई है तथा नए शैक्षणिक सत्र में 1 जुलाई के बजाय 21 जून से स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है।
प्रदेश सभा अध्यक्ष रामप्रताप मीणा ने बताया कि 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और छुट्टियों में कटौती से शिक्षकों में भारी रोष है।
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में सरकारी विद्यालयों में वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता एवं प्राचार्य के रिक्त पदों को भरना, शिक्षकों की पदोन्नति करना तथा जर्जर स्कूल भवनों का सुधार शामिल है। बताया गया कि चार वर्ष पूर्व क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक एवं महात्मा गांधी विद्यालयों में आज तक कई पद रिक्त हैं, जिससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
प्रांतीय महामंत्री गोपाल लाल मीणा ने बताया कि संगठन ने शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं करवाने, पारदर्शी तबादला नीति लागू करने, स्थानांतरण पर लगी रोक हटाने, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के तबादले शुरू करने और 6 वर्षों से लंबित पदोन्नतियां करने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा विद्यालयों में रिक्त पद शीघ्र भरने, जर्जर भवनों के निर्माण एवं मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट देने, पीएम पोषण योजना एवं कुक-कम-हेल्पर की राशि का शीघ्र भुगतान करने और वर्ष 2011 में नियुक्त शिक्षकों को टेट अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार से कानून बनाने की मांग की गई।
जिला अध्यक्ष वीरेंद्र मीणा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो 17 मई को राजधानी जयपुर में प्रदेशव्यापी बड़ा धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान प्रदेश, जिला एवं उपशाखा स्तर के अनेक पदाधिकारी और शिक्षक मौजूद रहे।




