कोर्ट ने फैसले में क्या-क्या कहा?
नई दिल्ली: वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े चर्चित आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को बेहद गंभीर और सुनियोजित अपराध मानते हुए दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी। यह फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है।
छह साल बाद आया अहम फैसला
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। बाद में उनका शव चांदबाग क्षेत्र के एक नाले से बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने की थी। लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान और फोरेंसिक साक्ष्यों के बाद अदालत ने पहले आरोपियों को दोषी ठहराया और अब सजा का फैसला सुनाया है।
अदालत ने सुनाई उम्रकैद
कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित चार अन्य दोषियों को हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपियों की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
पहले फांसी की मांग कर चुकी थी दिल्ली पुलिस
सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। पुलिस का तर्क था कि यह मामला "रेयरेस्ट ऑफ द रेयर" श्रेणी में आता है क्योंकि अंकित शर्मा के शरीर पर बड़ी संख्या में चोटों के निशान मिले थे। हालांकि अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
क्या था पूरा मामला?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। इन दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसी दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव नाले से बरामद हुआ था। जांच के दौरान पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए थे।




