चीनी खरीद पर नई पाबंदी, ग्राहकों को एक साथ ज्यादा स्टॉक करना मुश्किल
नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच अब ऑनलाइन किराना खरीदारी पर भी असर दिखाई देने लगा है। त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने और सप्लाई को लेकर दबाव के बीच क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और बड़े रिटेलर्स ने चीनी की खरीद पर सीमा लगानी शुरू कर दी है। कुछ प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को एक ऑर्डर में सीमित मात्रा में ही चीनी खरीदने की अनुमति दी जा रही है।
Blinkit, Zepto समेत प्लेटफॉर्म्स पर खरीद की सीमा
रिपोर्ट के मुताबिक Blinkit और Zepto समेत प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कुछ चीनी उत्पादों की खरीद सीमित की गई है। दिल्ली-एनसीआर में Blinkit पर कुछ 5 किलो वाले चीनी पैक्स के लिए एक ट्रांजैक्शन में एक पैक की सीमा देखी गई है। अन्य क्विक-कॉमर्स और रिटेल कंपनियां भी स्टॉक की उपलब्धता के आधार पर ग्राहकों को सीमित मात्रा में चीनी बेच रही हैं।
हालांकि, प्लेटफॉर्म और उत्पाद के अनुसार सीमा अलग-अलग हो सकती है। Zepto पर 5 किलो के चीनी पैक उपलब्ध दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ उत्पादों की उपलब्धता और खरीद सीमा अलग हो सकती है। इसलिए ग्राहकों के लिए ऑर्डर करते समय संबंधित उत्पाद पर लागू लिमिट देखना जरूरी है।
एक महीने में चीनी के दामों में बड़ा उछाल
चीनी की कीमतों में पिछले कुछ समय में तेज बढ़ोतरी हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने और सप्लाई पर दबाव के कारण कीमतों में लगातार तेजी आई है। कुछ रिपोर्टों में पिछले दो महीनों में कीमतों में करीब 40% तक बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है।
इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। घरों में चाय-कॉफी और रोजमर्रा के इस्तेमाल के अलावा त्योहारों के दौरान मिठाई, हलवा, पकवान और अन्य व्यंजनों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बजट पर भी पड़ सकता है।
सरकार ने भी उठाए कदम
चीनी की बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी डीलर्स के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट लागू की है। सरकार का यह आदेश 1 अगस्त 2026 से प्रभावी हुआ है और 30 नवंबर 2026 तक लागू रहने वाला है। इसका उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना तथा घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सरकार ने यह भी कहा है कि हाल में एक्स-मिल चीनी कीमतों में हुई बढ़ोतरी मौजूदा मांग और आपूर्ति की बुनियादी स्थिति से पूरी तरह समर्थित नहीं है। ऐसे में स्टॉक सीमा के जरिए बाजार में अनावश्यक दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है।
थोक खरीदारों पर भी स्टॉक सीमा
बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बड़े संस्थागत खरीदारों के स्टॉक पर भी सीमा तय की है। रिपोर्टों के अनुसार थोक उपभोक्ताओं को सीमित अवधि के लिए निर्धारित मात्रा से अधिक चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी। इसका मकसद कारोबारियों और बड़े खरीदारों द्वारा जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने की संभावना को कम करना है।
सरकार के इन कदमों का असर आने वाले दिनों में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दिखाई दे सकता है। बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि त्योहारी मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई कितनी स्थिर रहती है।



