20 से 25 जुलाई के छात्र प्रदर्शन का पूरा मामला
नई दिल्ली: छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को बड़ा आदेश सुनाया। शीर्ष अदालत ने 20 से 25 जुलाई के दौरान हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIR को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि इन प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और संबंधित मामलों को बंद माना जाएगा। हालांकि, गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों को इस राहत से अलग रखा गया है।
यह फैसला उन छात्रों के लिए बड़ी राहत के तौर पर सामने आया है, जिनके खिलाफ जुलाई में हुए प्रदर्शनों के दौरान मामले दर्ज किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों से जुड़े मामलों पर चल रही कानूनी कार्रवाई को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।
20 से 25 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के सामने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से संबंधित कई FIR का मुद्दा पहुंचा था। केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इन मामलों को वापस लेने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के साथ-साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की ओर से भी संबंधित FIR को खत्म करने के लिए आवेदन किए गए थे।
अदालत ने इन मामलों पर सुनवाई करते हुए राहत का दायरा केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संबंधित अवधि में छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर व्यापक निर्देश दिए।
छात्रों के खिलाफ FIR क्यों हुई थी?
जुलाई 2026 में छात्रों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में NEET-UG 2026 से जुड़े विवाद और अन्य मांगों को लेकर छात्र सड़कों पर उतरे थे।
20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसके बाद पुलिस की ओर से कई FIR दर्ज की गई थीं। दिल्ली पुलिस ने बाद में सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है और उन्हें खत्म करने की अनुमति चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने FIR को लेकर क्या निर्देश दिया?
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 20 से 25 जुलाई के छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIR को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। अदालत ने संबंधित मामलों को बंद करने का आदेश दिया।
LiveLaw के मुताबिक, अदालत ने देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उस अवधि के छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी संबंधित FIR को बंद करने का निर्देश दिया। साथ ही, भविष्य में उन्हीं घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज करने पर भी रोक लगाई गई।
यह फैसला छात्रों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि FIR दर्ज होने के बाद लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया उनके शिक्षा और भविष्य पर असर डाल सकती है।
गंभीर आपराधिक मामलों वालों को राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी रखा गया है। गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रह सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस को 2,873 ऐसे लोगों के संबंध में एक अलग FIR आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि होने की बात सामने आई है।
इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश हर व्यक्ति को बिना किसी शर्त के आपराधिक मामलों से राहत देने वाला नहीं है। छात्रों और गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोगों के बीच अंतर किया गया है।
‘Criminal Antecedents’ का मतलब भी किया गया था स्पष्ट
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही ‘criminal antecedents’ शब्द को लेकर स्थिति स्पष्ट कर चुका था। 3 अगस्त को अदालत ने कहा था कि इसका मतलब केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है।
इससे उन छात्रों को राहत मिली थी जिन्हें छोटे या मामूली मामलों के आधार पर गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाला मान लिए जाने की चिंता थी।
केंद्र सरकार ने क्या भरोसा दिया?
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।
केंद्र ने यह भी आश्वासन दिया कि 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के संबंध में भविष्य में नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रतिबद्धता पूरी की जाएगी।
छात्रों के परिवारों को मुआवजे का भी मुद्दा
इस पूरे विवाद में केवल FIR का मामला ही नहीं था। प्रदर्शन से जुड़े आंदोलनकारियों की ओर से उन छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई थी, जिन्होंने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या की थी।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मुआवजे की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए उसे तीन महीने का समय चाहिए।
इस आश्वासन को भी छात्र आंदोलन से जुड़े विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
5 सितंबर का प्रस्तावित प्रदर्शन भी हुआ वापस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद



