श्रीगंगानगर के राजकीय चिकित्सालय में अस्पताल स्टाफ की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। यहां कार्यरत कर्मचारियों ने यह साबित कर दिया कि उनके लिए सेवा और जिम्मेदारी ही सबसे पहले है।
दरअसल, तीन दिन पूर्व चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर (MCH OT) में कार्यरत सहायक कर्मचारी विकास कुमार को वहां 1750 रुपये नकद और एक पर्ची मिली थी। यह राशि संभवतः किसी मरीज की थी, जो किसी प्रोसीजर या ऑपरेशन के दौरान अनजाने में गिर गई थी।
विकास कुमार ने बिना देर किए इस बारे में अपने इंचार्ज एवं सहायक कर्मचारी प्रभारी कुलदीप सिंह मान को सूचना दी। दोनों ने मिलकर यह तय किया कि राशि को सुरक्षित रखा जाए और असली मालिक की पहचान कर उसे लौटाया जाए।
इसके बाद शुरू हुई उस मरीज की तलाश, जो इन पैसों का असली हकदार था। हालांकि यह कार्य आसान नहीं था, क्योंकि मरीज अस्पताल में भर्ती तो था, लेकिन उसकी सही पहचान और वार्ड की जानकारी स्पष्ट नहीं थी।
अगले तीन दिनों तक विकास कुमार और कुलदीप सिंह मान ने लगातार विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों से जानकारी ली। उन्होंने हर संभव प्रयास किया कि असली व्यक्ति तक यह राशि पहुंचाई जा सके।
आखिरकार तीसरे दिन उनकी मेहनत रंग लाई और संबंधित मरीज की पहचान हो गई। पुष्टि के लिए जब मरीज से पूछताछ की गई, तो उसने पर्ची पर लिखे घर के सामान की पूरी जानकारी सही-सही बता दी। यह मिलान होने के बाद पूरी पारदर्शिता के साथ विकास कुमार ने अपने प्रभारी की मौजूदगी में 1750 रुपये मरीज को वापस सौंप दिए।
मरीज ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में प्रोसीजर के दौरान उसे यह आभास भी नहीं हुआ कि उसके पैसे कहीं गिर गए हैं। तीन दिन बाद जब अस्पताल स्टाफ ने खुद उसे पैसे लौटाए, तो वह भावुक हो गया और उसने कर्मचारियों का दिल से आभार जताया।
अस्पताल प्रशासन ने भी विकास कुमार और कुलदीप सिंह मान की इस ईमानदारी और समर्पण की खुले दिल से सराहना की है। उनका कहना है कि इस तरह के कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और लोगों का भरोसा सरकारी संस्थानों पर मजबूत करते हैं।




