क्या लोकतंत्र में अपनी बात सुनाने के लिए अनशन ही आखिरी रास्ता बच गया है?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 16 दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। उनकी सेहत लगातार खराब होती जा रही है। जानकारी के अनुसार इस दौरान उनका करीब 8.2 किलो वजन कम हो चुका है, जिससे समर्थकों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर मेडिकल जांच की जा रही है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को जनता की आवाज़ सुननी चाहिए और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। उनके समर्थकों का भी कहना है कि लोकतंत्र में संवाद सबसे मजबूत रास्ता होता है।
24वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन
सोनम वांगचुक के समर्थन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन भी लगातार जारी है। यह प्रदर्शन अब 24वें दिन में पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी इस आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया है। वहीं प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। वजन में भारी गिरावट के साथ डॉक्टर उनकी सेहत की लगातार निगरानी कर रहे हैं। समर्थकों ने सरकार से जल्द बातचीत शुरू करने और समाधान निकालने की अपील की है।




