2 करोड़ की कथित रिश्वत के मामले में ASP पर कार्रवाई
राजस्थान के उदयपुर में 2 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत के मामले ने पुलिस विभाग में हलचल बढ़ा दी है। राजस्थान ACB ने SOG के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सोनी से जुड़े मामले में उनके कथित बिचौलिये सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को रिश्वत लेते पकड़ा। इसके बाद ASP मुकेश सोनी को भी बालोतरा स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
ACB के मुताबिक, यह मामला उदयपुर नगर निगम के 272 भूखंडों से जुड़े प्रकरण से संबंधित है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मामले में गिरफ्तार आरोपियों को राहत दिलाने, दूसरे मामलों में आरोपी नहीं बनाने और कुछ दस्तावेज वापस करने के बदले 2 करोड़ रुपए की मांग की गई थी।
बिचौलिये के जरिए रकम लेने का आरोप
ACB के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया गया। सत्यापन में मांग की पुष्टि होने के बाद टीम ने ट्रैप कार्रवाई की।
आरोप है कि ASP के लिए उनके कथित बिचौलिये सज्जन सिंह जैन ने परिवादी से रकम ली। ACB टीम ने उसे मौके पर पकड़ लिया। इसके बाद ASP की भूमिका की जांच करते हुए उन्हें भी हिरासत में लिया गया।
2 करोड़ की रकम में 4 लाख असली नोट
ACB की कार्रवाई में इस्तेमाल की गई रकम को लेकर भी जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, कुल 2 करोड़ रुपए की रकम में 4 लाख रुपए असली भारतीय मुद्रा थी, जबकि बाकी रकम डमी करेंसी थी।
ACB ने बताया कि यह व्यवस्था ट्रैप कार्रवाई के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य कथित रिश्वत की मांग और रकम लेने की प्रक्रिया को पकड़ना था।
272 भूखंड मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
यह मामला उदयपुर नगर निगम के 272 भूखंडों से जुड़े प्रकरण से संबंधित बताया जा रहा है। ACB के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस मामले में गिरफ्तार लोगों को राहत दिलाने और आगे दूसरे मामलों में आरोपी नहीं बनाने के बदले रकम मांगी गई।
इसके अलावा गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के घर से मिले कुछ ऐसे दस्तावेजों को वापस करने की बात भी शिकायत में कही गई थी, जिन्हें औपचारिक रूप से जब्त रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया था।
सोने की घड़ी और बैंगल को लेकर क्या आरोप है?
मामले को लेकर सामने आई जानकारी में ASP पर बरामद सामान के रिकॉर्ड से जुड़ी गंभीर शिकायतों का भी उल्लेख है। आरोप है कि गिरफ्तारी या तलाशी के दौरान मिले कुछ कीमती सामान को आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।
हालांकि, सोने की घड़ी और बैंगल से जुड़ा आरोप अभी जांच के दायरे में है। इसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं लिखा जा सकता। ACB की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद सामान की आधिकारिक सूची में क्या दर्ज था और क्या नहीं।
30 सितंबर से पहले रकम देने की बात का आरोप
शिकायत से जुड़े आरोपों में यह भी कहा गया है कि कथित रकम एक तय समय सीमा से पहले देने के लिए कहा गया था। खबरों में 30 सितंबर से पहले रकम देने की बात का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इस समय सीमा और बातचीत से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक दस्तावेजों से ही होगी।



