सोशल मीडिया चैलेंज के लिए घर से निकले दो मासूम भाई, सुरक्षित मिलने से परिवार ने ली राहत की सांस
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और चैलेंज बच्चों को कई बार इतने आकर्षित करते हैं कि वे बिना सोचे-समझे उनकी नकल करने लगते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां 11 और 7 साल के दो भाई सोशल मीडिया पर देखा गया 24 घंटे वाला चैलेंज आजमाने के लिए घर से निकल गए। दोनों बच्चों के अचानक गायब होने से परिवार परेशान हो गया और उनकी तलाश शुरू की गई। राहत की बात यह रही कि बाद में दोनों बच्चे सुरक्षित मिल गए।
यह घटना बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और ऑनलाइन दिखाई देने वाली चीजों को बिना समझे अपनाने के खतरे की ओर ध्यान दिलाती है।
सोशल मीडिया पर देखा चैलेंज आजमाने निकले बच्चे
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों भाइयों ने ऑनलाइन एक ऐसा चैलेंज देखा था, जिसमें 24 घंटे तक घर से बाहर रहने जैसी बात शामिल थी। वीडियो से प्रभावित होकर उन्होंने भी इसे आजमाने का फैसला किया और घर से निकल गए।
कम उम्र में बच्चे अक्सर वीडियो देखकर उत्साहित हो जाते हैं। उन्हें यह समझना मुश्किल हो सकता है कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर गतिविधि सुरक्षित या वास्तविक जीवन में अपनाने लायक नहीं होती। कई बार वे किसी वीडियो को मनोरंजन समझकर देखते हैं, लेकिन उसकी नकल करते समय उससे जुड़े जोखिमों का अंदाजा नहीं लगा पाते।
बच्चों के लिए वायरल ट्रेंड क्यों बन जाते हैं आकर्षण?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चैलेंज, मजेदार वीडियो और ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय होते हैं। बच्चों को ऐसे वीडियो रोमांचक लग सकते हैं। वे अपने पसंदीदा क्रिएटर की नकल करना चाहते हैं या दोस्तों के बीच किसी ट्रेंड को आजमाकर चर्चा में आना चाहते हैं।
इस उम्र में बच्चों की निर्णय लेने की क्षमता अभी विकसित हो रही होती है। वे किसी काम के मजेदार हिस्से पर ध्यान दे सकते हैं, लेकिन उसके संभावित परिणामों के बारे में पूरी तरह नहीं सोच पाते। इसी वजह से कोई साधारण दिखने वाला ऑनलाइन चैलेंज भी वास्तविक जीवन में जोखिम पैदा कर सकता है।
हालांकि, हर ऑनलाइन ट्रेंड खतरनाक नहीं होता। परेशानी तब होती है, जब किसी चैलेंज में घर से बिना बताए निकलना, अनजान जगह पर जाना या अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज करना शामिल हो।
बच्चों को इंटरनेट की जिम्मेदार समझ देना जरूरी
बच्चों को केवल यह कहना काफी नहीं है कि मोबाइल पर सब कुछ सही नहीं होता। उन्हें उदाहरण देकर समझाना भी जरूरी है कि ऑनलाइन दिखाई देने वाली चीजें अक्सर मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं और उन्हें वास्तविक जीवन में दोहराना हमेशा सुरक्षित नहीं होता।
माता-पिता बच्चों के साथ मिलकर ऐसे वीडियो देख सकते हैं और चर्चा कर सकते हैं कि उनमें क्या सुरक्षित है और क्या नहीं। इससे बच्चे धीरे-धीरे सही और गलत फैसलों के बीच अंतर समझना सीख सकते हैं।



