जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल SMS हॉस्पिटल से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां मेडिकल ICU की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि ICU में कई बार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते और मरीजों की जिम्मेदारी ट्रेनी डॉक्टरों के भरोसे रह जाती है। ऐसे में गंभीर हालत वाले मरीजों के इलाज और उनकी निगरानी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मामला SMS हॉस्पिटल के मेडिकल ICU रूम से जुड़ा है, जहां भर्ती मरीजों को लगातार निगरानी और समय पर इलाज की जरूरत होती है। ICU में किसी मरीज की हालत अचानक बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर का फैसला जरूरी होता है। ऐसे में अगर सीनियर स्तर का डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं हो और ट्रेनी डॉक्टरों को ही स्थिति संभालनी पड़े, तो अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा यूनिट हेड के कथित बयान को लेकर हो रही है। जब उनसे ड्यूटी पर डॉक्टरों की मौजूदगी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि डॉक्टर हैं या नहीं, इसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं। इस बयान ने अस्पताल की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेडिकल ICU में भर्ती मरीजों की हालत सामान्य मरीजों से ज्यादा गंभीर होती है। यहां डॉक्टरों को मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होती है और जरूरत पड़ने पर तुरंत दवा, जांच या दूसरे इलाज का फैसला लेना पड़ता है। ऐसे में ड्यूटी पर सीनियर रेजिडेंट की मौजूदगी को लेकर उठ रहे सवाल काफी गंभीर माने जा रहे हैं।
दूसरी तरफ, अगर ट्रेनी डॉक्टरों पर ही ICU में मरीजों की जिम्मेदारी रहती है, तो उनकी भूमिका और निगरानी की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए। ट्रेनी डॉक्टरों को वरिष्ठ डॉक्टरों से मार्गदर्शन और जरूरत के समय तत्काल सहायता मिलना जरूरी है। अस्पताल में डॉक्टरों की ड्यूटी और उनकी मौजूदगी को लेकर स्पष्ट मॉनिटरिंग व्यवस्था होने की उम्मीद की जाती है।
इस मामले ने सिर्फ एक ICU की व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की ड्यूटी मॉनिटरिंग पर भी सवाल खड़े किए हैं। मरीज और उनके परिजन यह उम्मीद करते हैं कि गंभीर स्थिति में उन्हें समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की मदद मिले।



