दूरदर्शन पर कैसे टेलीकास्ट हुआ ‘श्री कृष्णा’? रामानंद सागर की कहानी
टीवी के इतिहास में कुछ ऐसे धारावाहिक रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया बल्कि दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। रामानंद सागर का ‘श्री कृष्णा’ भी ऐसा ही लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं पर आधारित इस शो ने टेलीविजन पर अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि, इस धारावाहिक का दूरदर्शन पर प्रसारण इतनी आसानी से नहीं हुआ था। इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी बताई जाती है, जिसमें रामानंद सागर की रणनीति और उस दौर के राजनीतिक हस्तक्षेप का भी जिक्र मिलता है।
‘रामायण’ के बाद रामानंद सागर ने बनाया था ‘श्री कृष्णा’
रामानंद सागर भारतीय टेलीविजन के उन निर्माताओं में शामिल रहे, जिन्होंने पौराणिक कथाओं को छोटे पर्दे पर बेहद लोकप्रिय बनाया। उनके धारावाहिक ‘रामायण’ ने देशभर में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की थी। इसके बाद रामानंद सागर ने भगवान श्रीकृष्ण की कथा को टेलीविजन पर प्रस्तुत करने का फैसला किया।
‘श्री कृष्णा’ में भगवान श्रीकृष्ण के बचपन से लेकर उनके जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों को कहानी के रूप में दिखाया गया। धारावाहिक में कृष्ण की बाल लीलाओं, कंस के अत्याचार, मथुरा आगमन और महाभारत से जुड़े प्रसंगों को भी दर्शाया गया।
दूरदर्शन पर शो को लेकर सामने आई मुश्किल
बताया जाता है कि ‘श्री कृष्णा’ को दूरदर्शन पर लाने की राह आसान नहीं थी। उस समय सरकारी प्रसारणकर्ता दूरदर्शन पर किसी बड़े धारावाहिक को जगह मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण था। रामानंद सागर पहले ही ‘रामायण’ के जरिए दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना चुके थे, लेकिन ‘श्री कृष्णा’ को लेकर शुरुआती स्तर पर परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं।
यहीं से इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सामने आता है। शो को लेकर निर्णय और उसके प्रसारण से जुड़ी प्रक्रिया में कई तरह की अड़चनें सामने आईं। ऐसे समय में रामानंद सागर ने कथित तौर पर ऐसा रास्ता अपनाया, जिसने आगे चलकर धारावाहिक को दर्शकों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
रामानंद सागर का ‘मास्टर स्ट्रोक’
रामानंद सागर सिर्फ निर्माता ही नहीं बल्कि टेलीविजन की नब्ज समझने वाले अनुभवी व्यक्ति भी थे। उन्हें पता था कि धार्मिक और पौराणिक कहानियों का भारतीय दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव है। ‘रामायण’ की सफलता इसका बड़ा उदाहरण थी।
‘श्री कृष्णा’ को लेकर भी उन्होंने ऐसी रणनीति अपनाई, जिसमें शो की कहानी, प्रस्तुति और धार्मिक महत्व को प्रमुखता दी गई। इसी रणनीति को इस धारावाहिक की टीवी यात्रा का ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जाता है।
शो को लेकर उस दौर में जो घटनाक्रम हुआ, उसने बाद में ‘श्री कृष्णा’ के प्रसारण का रास्ता साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अरुण जेटली का भी आया जिक्र
इस कहानी में वरिष्ठ नेता और वकील रहे अरुण जेटली का नाम भी सामने आता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘श्री कृष्णा’ के दूरदर्शन पर प्रसारण से जुड़े घटनाक्रम में उनकी भूमिका का जिक्र किया जाता है।
उस दौर में दूरदर्शन सरकारी नियंत्रण वाला प्रमुख टेलीविजन नेटवर्क था और किसी बड़े कार्यक्रम के प्रसारण को लेकर कई स्तरों पर निर्णय लिए जाते थे। ऐसे में ‘श्री कृष्णा’ को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने इस धारावाहिक की शुरुआत को और भी दिलचस्प बना दिया।
हालांकि, इस पूरी कहानी को समझने के लिए उस समय के टेलीविजन और दूरदर्शन के माहौल को भी ध्यान में रखना जरूरी है।



