बनासकांठा वन्यजीव विभाग के अंतर्गत दांता पूर्व रेंज में दर्ज जंगली शियाल (लोमड़ी) के शिकार और उसके अवशेषों के अवैध व्यापार से जुड़े गंभीर मामले में सेशन कोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
माननीय द्वितीय अतिरिक्त सेशन जज श्री कानाणी की अदालत ने टिप्पणी की कि वन्यजीवों की हत्या केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर हमला और समाज पर व्यापक प्रभाव डालने वाला अपराध है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बिल्कुल अस्वीकार्य है।
प्रकरण के अनुसार, दांता पूर्व रेंज में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 तथा संशोधन अधिनियम 2022 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई थी। जांच अधिकारी एवं परिक्षेत्र वन अधिकारी श्री वी.एल. चौधरी ने गहन जांच कर वन्यजीव अवशेषों के अवैध व्यापार से जुड़े पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इसके बाद 27/01/2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट, दांता में चार्जशीट दाखिल की गई।
आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 483 के तहत जमानत के लिए सेशन कोर्ट में आवेदन किया था। 18/02/2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने वन्यजीवों को प्रकृति की अमूल्य संपत्ति बताते हुए अपराध की गंभीरता पर जोर दिया। सरकारी पक्ष की दलीलों और वन विभाग द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए अदालत ने जमानत याचिका नामंजूर कर दी और आरोपी को जेल हिरासत में रखने का आदेश दिया।
वन्यजीव संरक्षण और अवैध शिकार के खिलाफ इस कार्रवाई से अन्य संभावित अपराधियों के लिए स्पष्ट चेतावनी भी स्थापित होती है। दांता परिक्षेत्र वन अधिकारी द्वारा जारी प्रेस नोट में इस मामले की जानकारी दी गई है।
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें
राजनीति की हर हलचल, क्रिकेट और स्पोर्ट्स की हर अपडेट, और देश-दुनिया की बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए eNews Bharat के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ना न भूलें।




