उपखंड क्षेत्र के संवारिया गांव स्थित स्वयंभू नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा स्थल पर सुबह से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। भगवान शिव के जयकारों, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे।
कथा व्यास पंडित बनवारीलाल दाधीच (बोराड़ा) ने वायवीय संहिता के प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए उपमन्यु की अटूट शिव भक्ति, भगवान शिव की कृपा तथा उनके द्वारा दिए गए वरदानों की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं तथा उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
कथा के दौरान पंचाक्षर मंत्र "ॐ नमः शिवाय" की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कथाव्यास ने शिवरात्रि व्रत एवं पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, भक्ति और सत्कर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा के दौरान माता पार्वती की प्राण प्रतिष्ठा, कलश स्थापना एवं नवकुंडीय यज्ञ का आयोजन भी किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं जनकल्याण की कामना की।
धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के बाद आयोजित पंगत प्रसादी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण देखने को मिला।




