उपखंड क्षेत्र के सांवरिया गांव स्थित स्वयंभू नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और भगवान शिव के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में पूरी तरह लीन नजर आए।
कथा वाचक पंडित बनवारीलाल दाधीच (बोराड़ा वाले) ने भगवान नीलकंठ महादेव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव सृष्टि के कल्याण और धर्म की रक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होकर भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं।
कथा के दौरान सृष्टि विस्तार, दक्ष प्रजापति द्वारा माता शिवा की आराधना, माता सती के रूप में अवतरण, भगवान शिव एवं माता सती के विवाह तथा दक्ष यज्ञ के प्रसंगों का भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया गया। पंडित दाधीच ने बताया कि दक्ष यज्ञ में हुए अपमान से आहत होकर माता सती ने योगाग्नि द्वारा देह त्याग कर आत्मसम्मान, धर्म और मर्यादा की रक्षा का संदेश दिया। कथा के इस प्रसंग को सुनकर अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
कथा वाचक ने कहा कि भगवान शिव की आराधना मनुष्य को संयम, धैर्य, सदाचार और सकारात्मक जीवन मूल्यों का मार्ग दिखाती है। शिव भक्ति से न केवल आध्यात्मिक उन्नति होती है, बल्कि जीवन की अनेक कठिनाइयों का समाधान भी प्राप्त होता है।
इस अवसर पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य और उसकी दिव्य महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की आराधना से भक्तों को पुण्य, शांति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं को भगवान शिव के नाम का निरंतर स्मरण करने तथा धार्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश भी दिया गया।
कथा स्थल पर भजन, शिव स्तुति और धार्मिक आयोजनों के कारण वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं। इस अवसर पर जगदीश चांद (सरपंच प्रतिनिधि), शिवराज पीटीआई, बैजनाथ एईएन, रघुनाथ पटवारी, रामप्रसाद साहू, रतन ठेकेदार, रामेश्वर पलसाला, जगदीश पटेल, रोडू पटेल, प्रभु सांडीवाल, रामकिशन, रामबीर सांडीवाल, श्योजी कबाड़ी, मंगलाराम, जसराज सांडीवाल, रामस्वरूप प्रजापत, लक्ष्मीनारायण, रामअवतार जांगिड़ एवं सुखलाल जाट सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




