बजट संकट में फंसा शेरगढ़ किला, चौथी बार भी नहीं मिली विकास एजेंसी
राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल बारां का शेरगढ़ किला बजट और टेंडर संकट के कारण विकास की राह नहीं पकड़ पा रहा है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने अक्टूबर 2025 से अब तक चार बार टेंडर जारी किए, लेकिन एक भी फर्म ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। अब विभाग ने पांचवीं बार फिर से निविदा आमंत्रित की है।
सिर्फ शेरगढ़ किला ही नहीं, बल्कि वल्लभनगर का शीतला माता कुंड, झुंझुनूं की मेडतानी बावड़ी और नाथद्वारा का सुंदर विलास कुंड जैसी ऐतिहासिक धरोहरों की डीपीआर तैयार करने के लिए भी पांच-पांच बार टेंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन किसी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया।
जानकारी के अनुसार, विभाग पहले से चल रहे विकास कार्यों का भुगतान समय पर नहीं कर पा रहा है। बजट की कमी के चलते कई परियोजनाएं धीमी पड़ गई हैं या पूरी तरह रुक चुकी हैं। ऐसे में नई परियोजनाओं में निजी फर्में रुचि नहीं दिखा रही हैं, क्योंकि उन्हें भुगतान को लेकर भरोसा नहीं है।
वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बजट में सरकार ने 32 ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों के जीर्णोद्धार और विकास के लिए 45.5 करोड़ रुपये की घोषणा की थी। हालांकि अब तक केवल चार परियोजनाओं को ही आंशिक बजट मिल पाया है, जबकि अधिकांश कार्य वित्तीय संसाधनों के अभाव में अटके हुए हैं।
विभाग ने बिना पर्याप्त बजट के 16 स्मारकों पर काम शुरू करा दिया था, लेकिन अब इन परियोजनाओं की रफ्तार धीमी हो गई है। इनमें आमेर की मांजी की बावड़ी, खाटूश्यामजी मार्ग की रैवासा बावड़ी, सवाई माधोपुर की हाड़ी रानी की बावड़ी, अलवर की मूसी महारानी की छतरी समेत कई ऐतिहासिक धरोहरें शामिल हैं।




