बच्चों के बड़े होने के बाद खुद की पहचान खोने का डर कई महिलाओं में सामान्य है। जानिए एक्सपर्ट से कैसे दोबारा आत्मविश्वास, करियर और अपनी नई पहचान बनाई जा सकती है।
34 वर्षीय एक महिला बताती हैं कि शादी के बाद परिवार की बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। धीरे-धीरे उनकी पूरी पहचान पत्नी, बहू और मां तक सीमित होकर रह गई। अब जब उनके बच्चे स्कूल जाने लगे हैं, तो उन्हें महसूस हो रहा है कि उन्होंने अपना अधिकांश जीवन दूसरों के लिए जिया है।
महिला का कहना है कि अब उन्हें डर सताने लगा है कि जब बच्चे बड़े होकर अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाएंगे, तब उनकी अपनी पहचान क्या होगी। कभी उन्हें दोबारा करियर शुरू करने का मन करता है, तो कभी लगता है कि अब बहुत देर हो चुकी है।
उनका सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह आइडेंटिटी क्राइसिस (Identity Crisis) है और इससे बाहर निकलकर खुद को दोबारा कैसे खोजा जा सकता है।
इस विषय पर डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट (आयरलैंड, यूके) और यूके, आयरिश व जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के सदस्य बताते हैं कि शादी, मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बाद कई महिलाओं में ऐसी भावनाएं सामान्य होती हैं। इसे अपनी पहचान को लेकर असमंजस या आइडेंटिटी क्राइसिस कहा जा सकता है।
उनके अनुसार, सबसे पहले यह स्वीकार करना जरूरी है कि आपकी पहचान केवल रिश्तों से नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व, रुचियों, कौशल और सपनों से भी बनती है। छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत करें, जैसे अपनी पसंद की गतिविधियों में समय देना, नई स्किल सीखना, पार्ट-टाइम या ऑनलाइन काम शुरू करना और आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान देना। सही योजना और सकारात्मक सोच के साथ किसी भी उम्र में नई शुरुआत की जा सकती है।




