बागोड़ा उपखण्ड क्षेत्र के सेवड़ी गांव में ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां कथित रूप से फर्जी सफाई अभियान चलाने का मामला उजागर हुआ है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है।
ग्रामीण मुराद मैहर ने आरोप लगाया है कि उनके निजी खर्चे पर करवाई गई सफाई को सरकारी कार्य के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, उन्होंने अपने घर मस्तान मंजिल के बाहर सुबह के समय दो मजदूरों को निजी तौर पर बुलाकर सफाई करवाई थी।
इसी दौरान “राजस्थान सरकार” लिखी एक गाड़ी में चार अधिकारी मौके पर पहुंचे और सफाई कर रहे मजदूरों के फोटो खींच लिए। आरोप है कि बाद में इन तस्वीरों को पंचायत समिति बागोड़ा के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा कर यह दर्शाया गया कि गांव में सरकारी स्तर पर सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
मुराद मैहर का कहना है कि जिन मजदूरों से सफाई करवाई गई, उन्हें पंचायत की ओर से किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया, क्योंकि यह कार्य पूरी तरह निजी खर्चे से कराया गया था।
बताया जा रहा है कि पूरी घटना घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जो इस मामले में अहम साक्ष्य के रूप में सामने आ सकती है। घटना के बाद ग्रामीण ने पंचायत पहुंचकर अधिकारियों के मोबाइल से संबंधित फोटो भी डिलीट करवाए।
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसे कि निजी मजदूरों की फोटो अधिकारियों द्वारा क्यों ली गई? क्या बिना कार्य किए सरकारी श्रेय लेने की कोशिश की जा रही है? क्या फर्जी फोटो के आधार पर बजट निकालने की साजिश है? और क्या यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह घटना ग्रामीण स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करती है और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है।




