एक तरफ बच्चों के हाथ में किताबें हैं, पीठ पर स्कूल बैग है और आंखों में पढ़ने का सपना. लेकिन स्कूल तक पहुंचने का रास्ता इतना मुश्किल है कि हर कदम पर खतरा दिखाई देता है।
बारिश के मौसम में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें बच्चे कीचड़ भरे रास्तों और पानी से होकर स्कूल जाते दिखाई दे रहे हैं। कहीं रास्ता इतना फिसलन भरा है कि बच्चे गिरने से बचते हुए आगे बढ़ रहे हैं, तो कहीं घुटनों तक पानी पार करके स्कूल जाना पड़ रहा है।
रायसेन में कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गैरतगंज तहसील के देवनगर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें छात्राएं कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाती दिखाई दे रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह बच्चों का रोज का रास्ता है। रास्ते में कीचड़ इतना ज्यादा है कि बच्चे स्कूल पहुंचने से पहले अपने पैर साफ करने के लिए पानी तलाशते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं।
इस रास्ते को लेकर सांप-बिच्छू जैसे जीवों का खतरा होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल के शिक्षक और ग्रामीण सड़क की मांग को लेकर पंचायत प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं।
गया में घुटनों तक पानी पार कर स्कूल
बिहार के गया जिले के मानपुर प्रखंड के कईया गांव की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है। यहां बच्चों को स्कूल जाने के लिए घुटनों तक पानी पार करने की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के आसपास नदी और नहर होने के बावजूद वहां पुल या सही रास्ते की सुविधा नहीं है। बारिश के दिनों में पानी बढ़ने से बच्चों के लिए स्कूल तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्ट में ग्रामीणों के हवाले से यह भी कहा गया है कि बारिश के दौरान बच्चे कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
बुरहानपुर में बच्चों की अपील- स्कूल की रोड बनवा दीजिए
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के देवला ग्राम पंचायत का बताया जा रहा एक और वीडियो भी चर्चा में है। इसमें बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल से घर लौटते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में बच्चे प्रशासन से स्कूल तक सड़क बनवाने की अपील करते नजर आते हैं। उनका कहना है कि इसी रास्ते से उन्हें रोज स्कूल जाना पड़ता है और बारिश में परेशानी और बढ़ जाती है।
सवाल बच्चों से नहीं, व्यवस्था से है
बच्चों के पास पढ़ने के लिए किताबें हैं, स्कूल जाने की इच्छा है और वे रोज अपने घर से निकलते भी हैं। लेकिन अगर स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता ही सुरक्षित नहीं है, तो सवाल व्यवस्था पर उठना स्वाभाविक है।
आखिर बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना किसकी जिम्मेदारी है?



