सायला उपखंड क्षेत्र के बावतरा गांव में रहने वाले बिजाराम उर्फ बिजपुरी गोस्वामी इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कुछ माह पूर्व हुए सड़क हादसे में उनके दोनों पैर फ्रैक्चर हो गए, जिसके बाद से वे चलने-फिरने में असमर्थ हैं। पहले मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले बिजपुरी अब पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो गए हैं।
परिवार की स्थिति और भी दयनीय इसलिए है क्योंकि उनके एकमात्र बेटे का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है और वह कमाने में सक्षम नहीं है। ऐसे में परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। बिजपुरी का कहना है कि हादसे के बाद अब तक उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिली है।
मिट्टी के झोपड़े में गुजर-बसर
बिजपुरी का परिवार एक कच्चे ‘साफरा’ (मिट्टी के घर) में रह रहा है। उनके पास न तो खेती योग्य जमीन है और न ही कोई स्थायी आय का साधन। उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता और आवागमन के लिए ई-रिक्शा या एक्टिवा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
पहले निभाई थी अहम भूमिका
बिजपुरी गोस्वामी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले बावतरा में एक महिला के कुएं में गिरने की घटना में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। प्रशासन के कई घंटों के प्रयास के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने अपनी सूझबूझ से कम खर्च में तरीका अपनाकर करीब ढाई घंटे में शव को बाहर निकालने में मदद की थी। इस कार्य के लिए उन्हें जिला कलेक्टर द्वारा सम्मानित भी किया गया था।
अब खुद मदद के मोहताज
जो व्यक्ति कभी दूसरों की मदद के लिए आगे आया, आज वही खुद सहायता के लिए सरकार के सामने गुहार लगा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से जल्द राहत देने की अपील की है।
प्रशासन का आश्वासन
मंत्री मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि यदि ऐसा मामला है तो अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच करवाई जाएगी और मुख्यमंत्री पुनर्वास योजनाओं से जोड़कर हर संभव मदद दी जाएगी।
वहीं सायला एसडीएम सूरजभान बिश्नोई ने कहा कि मामला अभी संज्ञान में नहीं है, लेकिन जानकारी मिलते ही जांच कर पात्रता अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।




