सावन 2026: उत्तर प्रदेश से कर्नाटक तक, जानिए भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाया जाता है सावन
सावन का महीना हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। वर्ष 2026 में सावन की शुरुआत 30 जुलाई से होगी और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। इस पूरे महीने देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ेगी। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे, व्रत रखेंगे, भजन-कीर्तन करेंगे और कांवड़ यात्रा में भाग लेंगे। हालांकि पूरे भारत में सावन का उद्देश्य भगवान शिव की आराधना ही है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में इसे मनाने की परंपराएं और रीति-रिवाज एक-दूसरे से काफी अलग और बेहद रोचक हैं।
उत्तर प्रदेश में सावन का महत्व
उत्तर प्रदेश में सावन का महीना सबसे अधिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। काशी विश्वनाथ, प्रयागराज, गोरखपुर, झांसी और प्रदेश के हजारों शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। श्रद्धालु गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।
सावन सोमवार का व्रत यहां विशेष महत्व रखता है। महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और अविवाहित युवतियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से व्रत रखती हैं। इसी महीने हरियाली तीज का त्योहार भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनती हैं, झूले झूलती हैं और सावन के लोकगीत गाकर इस मौसम का आनंद लेती हैं।
उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा का अद्भुत दृश्य
देवभूमि उत्तराखंड में सावन का अलग ही महत्व है। हरिद्वार, ऋषिकेश और नीलकंठ महादेव मंदिर में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़िए सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए अपने-अपने शहरों और गांवों के शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं।
पूरे रास्ते में कांवड़ यात्रियों के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा और विश्राम की विशेष व्यवस्था की जाती है। शिवभक्ति के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
मध्य प्रदेश में महाकाल की विशेष आराधना
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सावन के दौरान विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। महाकाल की भस्म आरती देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूरे महीने मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना होती है।
बिहार और झारखंड में बाबा धाम की आस्था
बिहार और झारखंड में सावन का महीना बाबा बैद्यनाथ धाम की वजह से बेहद खास माना जाता है। लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। यह भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है।
राजस्थान और हरियाणा में लोक संस्कृति का रंग
राजस्थान और हरियाणा में सावन केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि लोक संस्कृति का भी बड़ा उत्सव है। यहां महिलाएं मेहंदी लगाती हैं, झूले झूलती हैं और तीज के गीत गाती हैं। गांवों और कस्बों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। शिव मंदिरों में भक्त जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
महाराष्ट्र में शिव मंदिरों में उमड़ती है भीड़
महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर और घृष्णेश्वर जैसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में सावन के दौरान भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। श्रद्धालु विशेष पूजा, अभिषेक और रुद्र पाठ का आयोजन करते हैं। सोमवार के दिन मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं।




