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सऊदी तेल सप्लाई संकट से यूरोप में बढ़ी चिंता, अक्टूबर में सप्लाई रोकने की तैयारी

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद यूरोप की अक्टूबर क्रूड सप्लाई प्रभावित हुई है। Aramco ने कुछ रिफाइनरों को सप्लाई रोकने की जानकारी दी।

enews bharat19 September 2026
सऊदी तेल सप्लाई संकट से यूरोप में बढ़ी चिंता, अक्टूबर में सप्लाई रोकने की तैयारी

सऊदी तेल सप्लाई संकट से यूरोप में बढ़ी चिंता

सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। हमले से पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशन प्रभावित हुए और रेड सी के यानबू पोर्ट से होने वाली कच्चे तेल की लोडिंग भी बाधित हुई। इसके बाद सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को जानकारी दी है कि उन्हें अक्टूबर में सऊदी क्रूड की सप्लाई नहीं मिल पाएगी।

यूरोपीय रिफाइनर आम तौर पर सऊदी अरब से टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत हर महीने कच्चा तेल खरीदते हैं। ऐसे में अक्टूबर की सप्लाई रुकने की खबर ने यूरोप में वैकल्पिक क्रूड की तलाश तेज कर दी है। पोलैंड की Orlen समेत कुछ खरीदारों ने दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल जुटाने की कोशिश शुरू कर दी है। Reuters के मुताबिक, Orlen ने सऊदी सप्लाई में कमी की भरपाई के लिए नॉर्थ सी से मिलने वाले क्रूड की ओर रुख किया है।

ड्रोन हमले से ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन प्रभावित

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल को पश्चिमी तट पर स्थित यानबू तक पहुंचाने के लिए बेहद अहम है। यह रूट सऊदी अरब को तेल के कुछ निर्यात को रेड सी के रास्ते यूरोप तक भेजने का विकल्प देता है।

हालिया ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, हमले में तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके चलते यानबू पोर्ट पर क्रूड ऑयल की लोडिंग प्रभावित हुई और यूरोपीय ग्राहकों को मिलने वाली कुछ सप्लाई रद्द करनी पड़ी।

यह पाइपलाइन ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो गई है जब मध्य पूर्व के दूसरे प्रमुख तेल सप्लाई रूट पहले से ही व्यवधान का सामना कर रहे हैं।

पाइपलाइन को पूरी क्षमता पर लौटने में लग सकते हैं छह हफ्ते

पाइपलाइन की मरम्मत को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। ताजा रिपोर्टिंग के अनुसार, Aramco कुछ दिनों में पाइपलाइन को आंशिक रूप से दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रही है, जबकि पूरी क्षमता पर संचालन बहाल होने में करीब छह हफ्ते तक लग सकते हैं।

अगर पाइपलाइन लंबे समय तक सीमित क्षमता पर चलती है, तो इसका असर सऊदी अरब के पश्चिमी तट से होने वाले तेल निर्यात पर पड़ सकता है। यही वजह है कि यूरोपीय रिफाइनर पहले से ही दूसरे सप्लायरों और वैकल्पिक क्रूड ग्रेड की तलाश कर रहे हैं।

यूरोप ने शुरू की वैकल्पिक तेल की तलाश

सऊदी अरब यूरोप के लिए महत्वपूर्ण तेल सप्लायरों में शामिल है। ऐसे में अक्टूबर की सप्लाई में संभावित कमी के बाद यूरोपीय रिफाइनर वैकल्पिक स्रोतों की तरफ देख रहे हैं।

पोलैंड की तेल कंपनी Orlen इस बदलाव का एक उदाहरण है। Reuters के अनुसार, कंपनी ने सऊदी क्रूड की संभावित कमी को पूरा करने के लिए नॉर्थ सी से वैकल्पिक क्रूड खरीदने की कोशिश की है।

इसका मतलब यह है कि अगर सऊदी सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो यूरोपीय खरीदारों के बीच दूसरे तेल उत्पादक देशों से क्रूड खरीदने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

यानबू पोर्ट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

यानबू सऊदी अरब के रेड सी तट पर स्थित एक प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल यानबू तक पहुंचाया जाता है।

इस रूट का एक बड़ा फायदा यह है कि तेल को सऊदी अरब के पूर्व से पश्चिमी तट तक जमीन के रास्ते ले जाकर रेड सी के जरिए निर्यात किया जा सकता है। इससे कुछ मात्रा में ऐसे समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम होती है, जहां भू-राजनीतिक तनाव या सुरक्षा जोखिम सप्लाई को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, पाइपलाइन पर हुए हमले ने इसी वैकल्पिक रूट को भी प्रभावित कर दिया है। Reuters के मुताबिक, यानबू में क्रूड लोडिंग बाधित होने के बाद यूरोपीय ग्राहकों को मिलने वाली कुछ सप्लाई रद्द करनी पड़ी।

सऊदी अरब ने एशिया के लिए बढ़ाई वैकल्पिक सप्लाई

यूरोप को सप्लाई में परेशानी के बीच सऊदी अरामको ने खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई बढ़ाने के विकल्प पर भी काम किया है। ट्रेडिंग सूत्रों के मुताबिक, सितंबर और अक्टूबर में करीब 60 मिलियन बैरल क्रूड को सऊदी अरब के Ras Tanura पोर्ट से ओमान के Sohar पोर्ट के पास ship-to-ship transfers के जरिए भेजने की योजना बनाई गई है।

Reuters के अनुसार, इस व्यवस्था से सऊदी अरब की खाड़ी से होने वाली क्रूड सप्लाई औसतन करीब 1 से 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। चीन और दक्षिण कोरिया के रिफाइनर इसके प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, जबकि कुछ मात्रा भारत और जापान की ओर भी जाने की बात सामने आई है।

इस वैकल्पिक व्यवस्था ने ग्लोबल ऑयल मार्केट पर सप्लाई संकट के दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद की है।

ग्लोबल ऑयल मार्केट पर क्या असर?

सऊदी तेल सप्लाई में किसी भी बड़े व्यवधान का असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहता। सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है, इसलिए उसकी पाइपलाइन और निर्यात व्यवस्था में समस्या का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

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पाइपलाइन बंद होने की खबर के बाद तेल की कीमतों में तेज उछाल भी देखा गया। Reuters के मुताबिक, 15 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 3 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 108.75 डॉलर और WTI 105.83 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। बाद में सऊदी अरब द्वारा वैकल्पिक मार्गों से सप्लाई बढ़ाने की खबरों से कीमतों पर कुछ दबाव कम हुआ।

इससे साफ है कि बाजार में एक तरफ सप्लाई बाधित होने की चिंता है, तो दूसरी तरफ सऊदी अरब वैकल्पिक रास्तों से निर्यात बढ़ाकर उस कमी को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

क्या यूरोप में तेल की कीमत बढ़ सकती है?

सऊदी तेल सप्लाई संकट के कारण यूरोपीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका अंतिम असर कई बातों पर निर्भर करेगा—पाइपलाइन कितनी जल्दी पूरी क्षमता पर लौटती है, वैकल्पिक स्रोतों से कितना क्रूड उपलब्ध होता है और मध्य पूर्व के अन्य सप्लाई रूट कितने स्थिर रहते हैं।

अगर पाइपलाइन छह सप्ताह तक पूरी क्षमता से नहीं चल पाती और साथ ही दूसरे सप्लाई रूट भी प्रभावित रहते हैं, तो यूरोपीय रिफाइनरों को महंगे या लंबी दूरी वाले स्रोतों से क्रूड खरीदना पड़ सकता है। इससे रिफाइनिंग लागत और बाजार की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना बन सकती है।

हालांकि, फिलहाल इसे सीधे तौर पर यूरोप में तेल की कीमतों में किसी निश्चित बढ़ोतरी के रूप में देखना जल्दबाजी होगी, क्योंकि सऊदी अरब वैकल्पिक रास्तों से सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

भारत समेत एशियाई देशों पर भी नजर

सऊदी अरब की तेल सप्लाई में बदलाव का असर एशियाई बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। सऊदी अरामको द्वारा खाड़ी से बढ़ाई जा रही अतिरिक्त सप्लाई के खरीदारों में चीन, दक्षिण कोरिया, भारत और जापान शामिल बताए गए हैं।

भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव घरेलू ईंधन बाजार पर भी असर डाल सकता है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर प्रभाव सिर्फ कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होता। इसमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत, मुद्रा विनिमय दर और तेल कंपनियों की कीमत निर्धारण नीति जैसे कई कारक भी भूमिका निभाते हैं।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल पूरी नजर सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की मरम्मत और उसे दोबारा पूरी क्षमता पर शुरू करने पर है। अगर पाइपलाइन कुछ दिनों में आंशिक रूप से चालू हो जाती है और करीब छह सप्ताह में पूरी क्षमता हासिल कर लेती है, तो यूरोप की सप्लाई चिंता कुछ कम हो सकती है।

दूसरी ओर, अगर मरम्मत में देरी होती है या मध्य पूर्व में अन्य तेल सप्लाई रूट भी प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है—क्या सऊदी अरब वैकल्पिक रास्तों से तेल सप्लाई बढ़ाकर यूरोप और ग्लोबल मार्केट पर पड़ने वाले दबाव को नियंत्रित कर पाएगा, या पाइपलाइन की लंबी बंदी से तेल बाजार में नई परेशानी खड़ी होगी?


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