सरसों की तूड़ी से बिजली उत्पादन होने के कारण इसकी सालभर मांग बनी रहती है, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की अच्छी कमाई हो रही है। किसान भी इससे अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं, वहीं पराली जलाने की घटनाओं में भी कमी आई है।
क्षेत्र में कई कारोबारी करोड़ों रुपए की सरसों की तूड़ी खरीदकर खेतों में संग्रह कर रहे हैं। आवश्यकता होने पर इसे अन्य स्थानों पर वाहनों के जरिए भेजा जाता है। वर्तमान में बारां-मांगरोल मार्ग और हरसौली सड़क मार्ग पर तूड़ी के बड़े-बड़े ढेर देखे जा सकते हैं।
इस कार्य से जुड़े इब्राहीम अली और विनोद ने बताया कि इस व्यवसाय में सैकड़ों लोगों को रोजगार मिल रहा है। लगभग दो दशक पहले किसान सरसों की तूड़ी को जला देते थे, जिससे कई बार आग फैलकर नुकसान भी होता था। अब इसके उपयोग से किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है और यह कारोबार लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि इस वर्ष बिजली प्लांट पर सोलर सिस्टम लगने से सरसों की तूड़ी की मांग में कुछ कमी आई है, लेकिन इसके दाम में बढ़ोतरी जारी है। पिछले वर्ष 300 रुपए प्रति बीघा के भाव से खरीदी गई तूड़ी इस साल 350 रुपए प्रति बीघा तक पहुंच गई है। कई किसान तूड़ी के बदले मुफ्त थ्रेसिंग की सुविधा भी ले रहे हैं।
इब्राहीम अली के अनुसार, इस व्यवसाय से करीब 200 लोगों और 27 ट्रैक्टर-ट्रॉली चालकों को रोजगार मिल रहा है, जो खेतों से तूड़ी लाने का काम करते हैं।
चौकसी भी जरूरी:
तूड़ी के ढेरों में आग लगने की संभावना को देखते हुए विशेष सावधानी बरती जाती है। ढेर के चारों ओर पानी से भरे टैंकर रखे जाते हैं और करीब 25,000 लीटर पानी का भंडारण किया जाता है। साथ ही पाइपलाइन और मोटर के जरिए सिंचाई की व्यवस्था रहती है। गर्मियों में सुबह और शाम पानी का छिड़काव कर नमी बनाए रखी जाती है, ताकि आगजनी की घटनाओं से बचा जा सके।




