तिरंगा लेकर प्रदर्शन में पहुंचे थे साहिल
नई दिल्ली: प्रदर्शन के दौरान तिरंगा हाथ में लेकर पहुंचे साहिल उस वक्त घायल हो गए, जब कथित तौर पर पैलेट गन चली। साहिल के अनुसार, घटना के बाद उन्हें कुछ समय तक होश नहीं रहा और जब आंख खुली तो वे अस्पताल में थे। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद उनके शरीर में अब भी छर्रे मौजूद हैं और उनकी एक आंख की रोशनी प्रभावित हुई है।
साहिल ने घटना को याद करते हुए बताया कि वह प्रदर्शन में तिरंगा लेकर शामिल हुए थे। इसी दौरान अचानक पैलेट गन चलने की घटना हुई। इसके बाद स्थिति ऐसी बनी कि उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। साहिल के मुताबिक, होश आने पर उन्होंने खुद को अस्पताल में पाया।
शरीर में अब भी छर्रे होने का दावा
साहिल का कहना है कि घटना के बाद उनके शरीर में पैलेट के छर्रे अब भी मौजूद हैं। उन्होंने अपनी आंख की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। उनके अनुसार, चोट के कारण उन्हें आंख से देखने में परेशानी हो रही है। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
पैलेट गन से लगी चोटों के बाद घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता होती है। साहिल के मामले में भी घटना के बाद अस्पताल में इलाज कराया गया। उन्होंने अपने साथ हुई घटना को बताते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक बदल गए और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
तिरंगा हाथ में लेकर पहुंचे थे प्रदर्शन में
साहिल के मुताबिक, वह प्रदर्शन में अपनी बात रखने और तिरंगा लेकर शामिल हुए थे। उनका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान अचानक हुई कार्रवाई में वे इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
इस पूरे मामले में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। वहीं, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है।
आंख की रोशनी प्रभावित होने की बात
साहिल ने बताया कि चोट के बाद उनकी आंख की स्थिति सामान्य नहीं है और उन्हें दिखाई देने में परेशानी हो रही है। शरीर में छर्रे होने की बात भी उन्होंने कही है। ऐसे में आगे होने वाला चिकित्सकीय उपचार उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
घटना के बाद साहिल की आपबीती सामने आने से प्रदर्शन के दौरान घायल होने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर ऐसे प्रदर्शनों में भीड़ नियंत्रण के दौरान अपनाए जाने वाले तरीकों और उनके प्रभाव पर बहस होती रही है।



