राजस्थान सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत “ऋषभदेव पखवाड़े” से करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देशन में विद्यालयी शिक्षा विभाग ने यह अभिनव पहल शुरू की है।
इस निर्णय का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ना है, जिससे उनमें नैतिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और समग्र व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा मिल सके।
प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऋषभदेव पखवाड़े के तहत विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन सुनिश्चित किया जाए।
तीन वर्गों में प्रतियोगिताएं आयोजित
पूर्व प्राथमिक स्तर (3-6 वर्ष):
ऋषभदेव स्तुति, प्रार्थना, कहानी, प्रवचन, चित्रकारी, पोस्टर निर्माण
प्राथमिक स्तर (7-11 वर्ष):
स्तुति, प्रार्थना, कहानी, चित्रकला, पोस्टर, निबंध, कविता, एकल गायन
माध्यमिक स्तर (12-18 वर्ष):
प्रार्थना, प्रवचन, निबंध, रचनात्मक लेखन, रंगोली, योग शिविर, डिजिटल प्रस्तुतियां, मूक अभिनय, समूह चर्चा
चित्रकला और पोस्टर प्रतियोगिता में भगवान ऋषभदेव के जीवन प्रसंगों जैसे जन्म, दीक्षा, तप, ज्ञान, उपदेश एवं चारित्र के साथ राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्तिक और प्रतीक चिन्ह (बैल) जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
जानकारी और सहयोग के लिए संपर्क
राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् ने सभी विद्यालयों से अपील की है कि वे इस पखवाड़े से जुड़ी जानकारी के लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एवं कार्यक्रम अधिकारी से संपर्क करें या rsjyp21@gmail.com पर मेल करें।
समाज के प्रबुद्धजनों के विचार
इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन ने इस निर्णय को युवाओं के हित में बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थी वैदिक और श्रमण संस्कृति से परिचित होंगे।
वहीं एडवोकेट संजय जैन और महेश कुमार जैन हरसोरा ने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को अहिंसा और अपरिग्रह जैसे मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देगी।




