कार्यकाल खत्म होने के बाद भी वसूली और चुनाव के नाम पर धांधली, बूंदी में प्रेस वार्ता कर कार्यकारिणी पर उठाए गंभीर सवाल
इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी की वर्तमान कार्यकारिणी पर पद का दुरुपयोग करने, वित्तीय अनियमितताओं और संविधान के उद्देश्यों के विपरीत कार्य करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन सभी मामलों को लेकर बायपास रोड स्थित एक निजी रिसोर्ट में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें कार्यकारिणी के तानाशाही रवैए और कोष के कथित दुरुपयोग को उजागर किया गया।
6 लाख रुपये की अवैध वसूली और फर्जी सदस्यता का आरोप
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एडवोकेट अजय नुवाल ने बताया कि वर्तमान कार्यकारिणी का विधिक कार्यकाल सितंबर 2024 में ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद कार्यकारिणी कथित रूप से अवैध तरीके से पद पर बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव करवाने के नाम पर नियमों के विरुद्ध करीब 6 लाख रुपये की राशि वसूल की गई। साथ ही आगामी चुनाव को प्रभावित करने की नीयत से संस्था के नियमों को दरकिनार करते हुए लगभग 600 नए सदस्य बनाए गए, जिन्हें उन्होंने पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक बताया।
संविधान और मूल उद्देश्यों की हो रही अनदेखी
प्रेस वार्ता में मौजूद सदस्यों ने कहा कि जिस लोकतांत्रिक भावना और सामाजिक उद्देश्य के साथ संस्था के संविधान का निर्माण किया गया था, वर्तमान पदाधिकारी उसके विपरीत कार्य कर रहे हैं। उनका आरोप है कि संस्था के मुख्य कोष का उपयोग सदस्यों के हितों के बजाय निजी स्वार्थ और पद बचाने के लिए किया जा रहा है।
सदस्यों का कहना है कि कोष के कथित दुरुपयोग और मनमानी कार्यशैली के कारण संगठन के आम सदस्यों में भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।
निष्पक्ष जांच और नए चुनाव की मांग
प्रेस वार्ता के माध्यम से पीड़ित पक्ष और जागरूक सदस्यों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मांग रखी कि सितंबर 2024 के बाद वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा लिए गए सभी निर्णयों को निरस्त घोषित किया जाए।
साथ ही चुनाव के नाम पर वसूले गए 6 लाख रुपये तथा बनाए गए 600 नए सदस्यों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। सदस्यों ने मांग की कि वर्तमान कार्यकारिणी को हटाकर स्वतंत्र चुनाव अधिकारी की निगरानी में लोकतांत्रिक तरीके से नए चुनाव कराए जाएं।
आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और असंवैधानिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो वे न्यायालय की शरण लेंगे तथा व्यापक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।




