महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई ने लगातार चौथी बार रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, अक्टूबर में होगी अगली एमपीसी बैठक।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह निर्णय मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में लिया गया, जिसकी घोषणा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। केंद्रीय बैंक ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला किया है।
इस साल रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव
आरबीआई ने वर्ष 2026 में अब तक रेपो रेट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। इसके बाद फरवरी, अप्रैल, जून और अगस्त 2026 की एमपीसी बैठकों में ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है। साथ ही एमपीसी ने अपने न्यूट्रल पॉलिसी स्टांस को भी बरकरार रखा है। अब अगली मौद्रिक नीति समीक्षा अक्टूबर 2026 में होगी।
महंगाई अभी भी आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) अनुमान से अधिक बनी हुई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई का प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा सप्लाई चेन पर दबाव और मॉनसून की अनिश्चितता भी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में महंगाई में कुछ और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
मजबूत मांग से अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा
गवर्नर ने बताया कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लगातार समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था




