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रणथंभौर के गांवों में चीते की दस्तक, ग्रामीणों में दहशत

सवाई माधोपुर के रणथंभौर क्षेत्र में कुनो से आया चीता KP2 गांवों में घूम रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत और खेती प्रभावित हो रही

बृजेश त्रिवेदी6 May 2026
रणथंभौर के गांवों में चीते की दस्तक, ग्रामीणों में दहशत

रणथंभौर नेशनल पार्क इन दिनों एक अनोखी स्थिति का साक्षी बन गया है। प्रदेश का यह प्रमुख टाइगर रिजर्व अब ऐसा क्षेत्र बन चुका है, जहाँ एक साथ बाघ, तेंदुआ और चीता—तीनों खतरनाक वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है। हाल ही में मध्यप्रदेश के कुनो अभ्यारण से भटककर आया चीता ‘KP2’ पिछले करीब 20 दिनों से रणथंभौर और उससे सटे इलाकों में सक्रिय है।
यह चीता कभी रणथंभौर के जोन नंबर 8, 9 और 10 में देखा जा रहा है, तो कभी जंगल से निकलकर आसपास के गांवों की आबादी के करीब पहुंच रहा है। विशेष रूप से कैलाशपुरी गांव के नजदीक एक अमरूद के बगीचे में उसका लगातार मूवमेंट ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

गांवों में भय, खेती-बाड़ी पर असर

रणथंभौर की पैराफेरी में बसे कैलाशपुरी, दुमोदा, मोजीपुरा सहित श्याम वाटिका कॉलोनी तक चीते की आवाजाही से ग्रामीणों में भय का माहौल है। पिछले पांच से सात दिनों से कैलाशपुरी के पास अमरूद के बगीचे में उसकी लगातार मौजूदगी दर्ज की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि चीते के डर से वे खेतों और बगीचों में काम करने नहीं जा पा रहे हैं। इससे न केवल फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है, बल्कि निंदाई-गुड़ाई जैसे जरूरी कृषि कार्य भी ठप पड़े हैं। गर्मी के मौसम में पानी न मिलने से फसलें सूखने लगी हैं।

बच्चों और पशुओं पर खतरा

ग्रामीणों के अनुसार सबसे बड़ा खतरा बच्चों को लेकर है। मोजीपुरा गांव के कई बच्चे उसी रास्ते से स्कूल जाते हैं, जहां चीते का मूवमेंट देखा गया है। डर के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
इसके अलावा, चीते द्वारा कुछ बकरियों का शिकार किए जाने की भी सूचना है, जिससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि महिलाएं, पुरुष और बच्चे घरों में कैद होकर रहने को मजबूर हैं।

वन विभाग पर सवाल, कार्रवाई की मांग

हालांकि वन विभाग की टीमें चीते की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। क्षेत्रीय रेंजर और डीएफओ को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों ने मांग की है कि चीते को जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल के भीतर शिफ्ट किया जाए, ताकि गांवों में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।

लगातार बदल रहा मूवमेंट

गौरतलब है कि चीता KP2 सबसे पहले रणथंभौर की पालीघाट रेंज के अजीतपुरा गांव के पास देखा गया था। इसके बाद वह जोन नंबर 9 में पहुंचा और कुछ समय बाद श्याम वाटिका कॉलोनी तक जा पहुंचा। वर्तमान में उसका मूवमेंट जोन नंबर 10 और आसपास के गांवों के बीच बना हुआ है। वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी में जुटी हैं और अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। बावजूद इसके, चीते का बार-बार आबादी क्षेत्र में आना ग्रामीणों के लिए भय और असुरक्षा का कारण बना हुआ है।

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डीएफओ का बयान

डीएफओ मानस सिंह का कहना है कि कुनो अभ्यारण से चीता KP2 कुछ दिन पूर्व वहां से निकलकर रणथंभौर नेशनल पार्क आ पहुंचा। इसके बाद वन विभाग की टीम लगातार चीते की मॉनिटरिंग कर रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल चीते का मूवमेंट गांव से दूर है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार की घटना न हो।


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