रानीवाड़ा–दहीपुर–मैत्रीवाड़ा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क की स्थिति इन दिनों बेहद जर्जर हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली यह सड़क जगह-जगह से टूटी हुई है और आवागमन के लिए जोखिम भरी बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पैचवर्क के नाम पर केवल खानापूर्ति कर फाइल बंद कर दी गई, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार कार्य नहीं हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार करीब दो महीने पहले सड़क मरम्मत कार्य शुरू किया गया था, लेकिन केवल कंकड़ डालकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। उसके बाद से सड़क की हालत और बिगड़ती चली गई। स्थिति यह है कि चौकी तक जाने का रास्ता भी चलने योग्य नहीं बचा है, जिससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस मार्ग से स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, बीमार मरीज तथा दुपहिया और चारपहिया वाहन चालक प्रतिदिन गुजरते हैं, लेकिन टूटी सड़क के कारण दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र की सामूहिक समस्या बन चुकी है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह सड़क लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आती है और इसका नवीनीकरण वर्ष 2012 में किया गया था। अब सड़क पूरी तरह नॉन-पेचेबल श्रेणी में पहुंच चुकी है। पूर्व में विभाग को शिकायत भी दी गई थी, जिस पर अधिकारियों ने जल्द सुधार का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने विभाग पर कागजी कार्रवाई कर बजट खर्च दिखाने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि विभाग द्वारा समतलीकरण और पैचवर्क का दावा किया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। स्थानीय राजनीति और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है और सड़क की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि सड़क पर तुरंत प्रभाव से गुणवत्तापूर्ण पैचवर्क शुरू कराया जाए तथा पूरे मार्ग का शीघ्र नवीनीकरण किया जाए। विभाग की ओर से नवीनीकरण के लिए तकमीना तैयार कर स्वीकृति हेतु भेजे जाने की बात कही गई है, लेकिन जब तक स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक अस्थायी सुधार कार्य भी आवश्यक है। समस्या का शीघ्र समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।




