राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी अपडेट
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की नकदी चोरी के मामले में SIT ने अपनी फाइनल रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम शामिल नहीं किया गया है। गृह विभाग ने आगे की कार्रवाई के लिए यह रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंप दी है। अब इस रिपोर्ट को ट्रस्ट की 2 सितंबर को होने वाली बैठक में रखा जाएगा।
यह मामला उस समय सामने आया था, जब राम मंदिर के चढ़ावे की नकदी की गिनती और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से राज्य सरकार से मामले की जांच के लिए SIT गठित करने का अनुरोध किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की थी। IG रेंज किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन कुमार को SIT का सदस्य बनाया गया था।
पहली जांच में सामने आए गंभीर आरोप
SIT ने अपनी प्राथमिक जांच में गिनती कक्ष से नकदी चोरी और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही से जुड़े कई बिंदुओं की जानकारी सरकार को दी थी। पहली SIT की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि थाने में FIR दर्ज की गई। इस FIR में आठ लोगों को नामजद किया गया था।
इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल बताए गए। इन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
CCTV फुटेज में करीब 70 बार नकदी ले जाने का दावा
प्रारंभिक जांच में 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की CCTV फुटेज भी खंगाली गई थी। रिपोर्ट में करीब 70 बार कर्मचारियों द्वारा नकदी छिपाकर ले जाने जैसी गतिविधियां सामने आने की बात कही गई थी। जांच में यह भी सवाल उठा कि गिनती कक्ष में आने-जाने वाले कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं होती थी।
इसके अलावा ट्रस्ट और SBI की संयुक्त कार्यप्रणाली के तहत जिन प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए था, उनके पालन को लेकर भी जांच में सवाल सामने आए। यही वजह है कि मामले में सिर्फ कथित चोरी ही नहीं, बल्कि नकदी की सुरक्षा और पूरी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दूसरी SIT भी कर रही जांच
हालांकि, इस मामले में जांच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दूसरी SIT का भी गठन किया गया है।



