70 नहीं, 105 घटनाएं सामने आईं
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित गड़बड़ी के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नया अपडेट सामने आया है। SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शुरुआती जांच में सामने आई 70 घटनाओं के बजाय CCTV फुटेज की जांच में 105 कथित अनधिकृत निकासी या पैसे छिपाने की घटनाएं सामने आई हैं।
SIT ने अपनी जांच में CCTV फुटेज के साथ गवाहों के बयान, दान से जुड़े रिकॉर्ड, रसीदों और बैंक से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
CCTV फुटेज से हुई घटनाओं की पहचान
SIT के मुताबिक, मंदिर के दान की रकम की गिनती वाले कमरे से बिना अनुमति पैसे हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं CCTV फुटेज में सामने आईं। जांच टीम ने कई घंटों की रिकॉर्डिंग और दूसरे दस्तावेजों को मिलाकर मामले की पड़ताल की।
शुरुआत में सामने आई 70 घटनाओं के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। इसके बाद CCTV और अन्य रिकॉर्ड की जांच में घटनाओं की संख्या 105 तक पहुंची।
चार्जशीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में क्या बताया गया?
सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। कुछ रिपोर्टों में इसे अगले दो दिनों में दाखिल किए जाने की बात कही गई है।
इसकी एक वजह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद लागू 90 दिन की कानूनी समय-सीमा भी बताई गई है। पहली गिरफ्तारी के 90 दिन 25 सितंबर को पूरे होने हैं। सरकार ने अदालत को बताया कि समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कीमती सामान को लेकर भी हुई जांच
SIT ने केवल नकदी से जुड़े आरोपों की ही जांच नहीं की, बल्कि मंदिर में चढ़ावे के रूप में मिले कीमती सामान के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की। जांच में 86 ऐसे कीमती सामान का उल्लेख सामने आया, जिनके संबंध में रसीद नहीं होने की बात कही गई है।
वहीं, रिपोर्ट के अनुसार TCS सॉफ्टवेयर के जरिए 803 कीमती सामानों की रसीदों का सत्यापन किया गया। ट्रस्ट के रिकॉर्ड और SBI लॉकर में रखे कीमती सामान की भी जांच की गई।
SIT ने चांदी और कुछ अन्य दान की वस्तुओं से जुड़ी शिकायतों की भी जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में उपलब्ध रिकॉर्ड और पूछताछ के आधार पर गड़बड़ी नहीं मिली। यानी हर शिकायत या हर दान की वस्तु को चोरी का मामला नहीं माना गया है।



