सिरोही, जालौर और बाड़मेर में शिक्षा व्यवस्था पर संकट
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी अब गंभीर शिक्षा संकट का रूप लेती जा रही है। राज्य के कई दूर-दराज जिलों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जहां छात्रों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही मौजूद नहीं हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई जगह छात्रों को अपनी मांग मनवाने के लिए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है।
सिरोही, जालौर, बाड़मेर और अन्य सीमावर्ती जिलों के सरकारी स्कूलों में बच्चों का कहना है कि कई विषयों के शिक्षक महीनों से नहीं हैं। कहीं एक ही शिक्षक पूरे स्कूल का जिम्मा संभाल रहा है, तो कहीं छात्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।
दूर-दराज के स्कूलों में सबसे ज्यादा परेशानी
गुजरात सीमा से लगे सिरोही और जालौर जिले हों या पाकिस्तान सीमा से सटे बाड़मेर के गांव, कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं होने से नियमित कक्षाएं नहीं चल पा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक लंबे समय से नहीं हैं। कई स्कूलों में बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो गया है।
छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन
शिक्षकों की कमी से नाराज छात्र अब सड़कों पर उतर आए हैं। कई स्थानों पर विद्यार्थियों ने रैली निकालकर और प्रदर्शन कर प्रशासन से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि अगर जल्द ही खाली पद नहीं भरे गए तो हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और परीक्षा परिणामों पर भी इसका असर पड़ेगा।
क्या है 'वीआईपी टीचर सिस्टम'?
इस पूरे मामले में एक बार फिर तथाकथित 'वीआईपी टीचर सिस्टम' को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई शिक्षक प्रभावशाली स्थानों पर अपनी पोस्टिंग या प्रतिनियुक्ति करवा लेते हैं, जबकि दूरस्थ और ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक नहीं पहुंचते।
हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अलग-अलग समय पर सुधार के प्रयासों की बात कही गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई क्षेत्रों में अब भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है।




