राजस्थान में कम नामांकन वाले करीब 7,000 सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज करने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित इस बड़े फैसले पर अचानक ब्रेक लगने से हजारों स्कूलों को राहत मिली है। अब इन स्कूलों का भविष्य आगामी निर्णय पर निर्भर करेगा।
दरअसल, शिक्षा विभाग ने 25 से कम नामांकन वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी स्कूलों में मर्ज करने की योजना बनाई थी। इस संबंध में 23 मार्च को जयपुर में एक अहम बैठक प्रस्तावित थी, जिसमें सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के ऐसे स्कूलों की सूची प्रस्तुत करनी थी।
हालांकि, बैठक से ठीक पहले शिक्षा निदेशक द्वारा इसे स्थगित कर दिया गया। इसके पीछे आधिकारिक कारण नहीं बताया गया, लेकिन माना जा रहा है कि हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादलों, खासकर स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव के बदलाव के चलते यह निर्णय लिया गया है।
प्रदेश में ऐसे स्कूलों की संख्या करीब 7,000 बताई जा रही है, जिनमें 25 से कम विद्यार्थी नामांकित हैं। अकेले बीकानेर जिले में ही लगभग 280 ऐसे स्कूल चिन्हित किए गए हैं। यदि मर्जर का फैसला लागू होता, तो इन स्कूलों के विद्यार्थियों को पास के अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाता।
इस बीच, शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियां तेज कर दी हैं। 25 मार्च को प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में प्रवेशोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस दिन विद्यार्थियों को अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश दिया जाएगा, वहीं अभिभावकों को भी विद्यालय गतिविधियों में शामिल किया जाएगा।
कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को उसी दिन एडमिशन दिया जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी से जुड़े 5-6 वर्ष के बच्चों को कक्षा 1 में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। स्कूलों में होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड भी साझा किए जाएंगे और पुरानी किताबें जमा कर जरूरतमंद छात्रों को वितरित की जाएंगी।
फिलहाल स्कूलों के मर्जर पर रोक लगने से ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आने वाले समय में इस पर सरकार का अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण होगा।




