राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान रोडवेज बसों की स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन में यह मुद्दा इतना गरमा गया कि कांग्रेस और भाजपा के विधायक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगे।
कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने क्षेत्र में रोडवेज बसें नहीं चलने का मुद्दा उठाया। इस पर परिवहन मंत्री और डिप्टी सीएम Prem Chand Bairwa ने जवाब देते हुए कहा कि कम यात्रीभार के कारण नादौती-टोडाभीम क्षेत्र में बस सेवा संचालित नहीं की गई।
मेहर ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि रोडवेज की खराब स्थिति के पीछे निजी बस संचालकों से मिलीभगत जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि यदि यही हाल रहा तो रोडवेज को बंद कर देना चाहिए। इस पर बैरवा ने जवाब दिया कि रोडवेज का नुकसान पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण हुआ।
सदन में यह बहस तब और तेज हो गई जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों के बीच तीखी टिप्पणियों के कारण सदन का माहौल गरमाया रहा।
इसी दौरान परवन सिंचाई परियोजना का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस विधायक प्रमोद जैन भाया ने आरोप लगाया कि परियोजना में घटिया गुणवत्ता के एचडीपीई पाइप लगाए गए, जिससे करोड़ों रुपये का फायदा ठेकेदारों को पहुंचा और किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा।
जल संसाधन मंत्री Suresh Singh Rawat ने जवाब देते हुए कहा कि वर्ष 2018 में तत्कालीन कांग्रेस विधायक की शिकायत पर संबंधित इंजीनियरों को निलंबित किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय भी यह मामला कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का था, इसलिए आरोप लगाते समय विपक्ष को अपने रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए।
विधानसभा में आज वर्ष 2026-27 का बजट पारित होने की प्रक्रिया भी जारी है। एप्रोप्रिएशन बिल पर दिनभर चर्चा के बाद शाम को मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma बजट बहस का जवाब देंगे और संभावित नई घोषणाएं कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान उठे ये मुद्दे आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को और गरमा सकते हैं। रोडवेज की वित्तीय स्थिति और सिंचाई परियोजनाओं की पारदर्शिता जैसे विषय जनता से सीधे जुड़े हैं, इसलिए इन पर सियासी बयानबाजी तेज रहना तय है।




