राजस्थान निकाय चुनाव में बदला अध्यक्ष पद का गणित
राजस्थान की सियासत में निकाय चुनाव के नतीजों ने कई जगह पार्षदों की संख्या और अध्यक्ष पद के चुनाव के बीच अलग-अलग तस्वीर दिखाई है। कई निकायों में जिस पार्टी के पास ज्यादा पार्षद थे, वहां मेयर या चेयरमैन का पद दूसरी पार्टी के प्रत्याशी के खाते में चला गया। इससे अध्यक्ष पद के चुनाव में वोटिंग पैटर्न और स्थानीय राजनीतिक समीकरण चर्चा में आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, घोषित नतीजों में 198 निकायों में भाजपा के मेयर, सभापति और चेयरमैन चुने गए हैं, जबकि 95 निकायों में कांग्रेस के प्रत्याशी अध्यक्ष पद पर पहुंचे। वहीं आम आदमी पार्टी ने बारां में अपना पहला नगर निकाय बोर्ड बनाकर भी ध्यान खींचा।
अजमेर में पार्षदों की संख्या के बावजूद बदला परिणाम
अजमेर का अध्यक्ष पद चुनाव इस लिहाज से खास रहा। यहां कांग्रेस के पास 37 पार्षद थे, जबकि भाजपा के पास 32 पार्षद थे। इसके बावजूद मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। यह परिणाम इसलिए चर्चा में रहा क्योंकि पार्षदों की शुरुआती संख्या से अलग वोटिंग का आंकड़ा सामने आया।
पाली में भी वोटिंग का गणित बदला
पाली में कांग्रेस 29 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल थी। इसके बावजूद भाजपा की नमिता बुबकिया को मेयर चुनाव में 33 वोट मिले और वह अध्यक्ष पद पर चुनी गईं। इस नतीजे ने भी पार्षदों की संख्या और अध्यक्ष पद की वोटिंग के बीच अंतर को सामने रखा।
बीकानेर में कांग्रेस को मिली सफलता
दूसरी ओर बीकानेर में कांग्रेस अपने संख्या बल को अध्यक्ष पद तक पहुंचाने में कामयाब रही। यहां अनिल कल्ला मेयर चुने गए। इस नतीजे ने दिखाया कि अलग-अलग निकायों में स्थानीय समीकरण और पार्षदों की वोटिंग का पैटर्न अलग रहा।
अटरू में शिक्षा मंत्री के भाई हारे
बारां के अटरू में भी अध्यक्ष पद का चुनाव चर्चा में रहा। यहां कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी दिलावर को तीन वोट से हराया।



