राजस्थान में नशे से मौतों का बढ़ता खतरा
राजस्थान में नशे से जुड़ी मौतों को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नशे से होने वाली मौतों के मामले में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है। यह स्थिति राज्य में नशीले पदार्थों की बढ़ती उपलब्धता और उनके इस्तेमाल से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की ओर इशारा करती है।
घास और केमिकल से तैयार किया जा रहा कथित गांजा
नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में कथित तौर पर ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है, जिनमें घास जैसी सामग्री के साथ रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। अमोनियम नाइट्रेट जैसे केमिकल के इस्तेमाल का दावा भी सामने आया है। हालांकि, किसी जब्त पदार्थ की वास्तविक संरचना की पुष्टि केवल अधिकृत फॉरेंसिक जांच से ही की जा सकती है।
ऐसे सिंथेटिक या मिलावटी नशीले पदार्थों में मौजूद अज्ञात रसायन शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं। इनका सेवन करने वाले व्यक्ति को यह पता भी नहीं होता कि पदार्थ में कौन-कौन से केमिकल मौजूद हैं।
ब्रेन और हार्ट पर गंभीर असर
मिलावटी या अज्ञात रसायनों वाले नशीले पदार्थों का सेवन दिमाग और हृदय समेत शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। तेज धड़कन, भ्रम, बेहोशी, दौरे और सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। कुछ मामलों में स्थिति जानलेवा भी बन सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि युवाओं में जागरूकता, समय पर इलाज और नशामुक्ति सेवाओं तक आसान पहुंच भी जरूरी है।



