राजस्थान में लिव-इन पर सख्ती, बिना सूचना रहने पर 3 माह तक जेल
जयपुर। राजस्थान में भजनलाल सरकार अब विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बड़ा कानूनी बदलाव करने की तैयारी में है। कैबिनेट से मंजूर ‘द राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) विधेयक-2026’ को अब विधानसभा में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित कानून में अनुसूचित जनजाति परिवारों को छोड़कर सभी धर्मों और समुदायों के लिए कई मामलों में समान कानूनी प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।
इस प्रस्तावित कानून में करीब 400 धाराएं होने की जानकारी सामने आई है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों को लेकर एक समान और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था तैयार करना है।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर सख्त प्रावधान
प्रस्तावित UCC विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई महत्वपूर्ण नियम रखे गए हैं। इनके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति बिना सूचना दिए एक महीने से ज्यादा समय तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
ऐसे मामले में तीन महीने तक की जेल और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। वहीं गलत सूचना देने पर भी तीन महीने तक की जेल और 10 हजार रुपये तक जुर्माने की बात कही गई है।
अगर किसी व्यक्ति को लिव-इन संबंध से जुड़ा नोटिस दिया जाता है और वह उसका जवाब नहीं देता है, तो 6 महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार ने जबरन सहमति से जुड़े मामलों में भी कड़ा प्रावधान रखा है। प्रस्तावित कानून के अनुसार, जबरन सहमति कराने पर 5 साल तक की जेल हो सकती है।
नाबालिग के साथ लिव-इन पर POCSO का प्रावधान
प्रस्तावित कानून में नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। अगर कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र के पार्टनर को शादीशुदा की तरह रखता है, तो उसके खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मामला चलाया जा सकता है।
इस प्रावधान का उद्देश्य नाबालिगों को शादी या लिव-इन जैसे संबंधों में शोषण से बचाना बताया गया है।
सभी धर्मों में तलाक के लिए समान नियम
प्रस्तावित UCC में तलाक को लेकर भी बड़ा बदलाव बताया गया है। अनुसूचित जनजाति परिवारों को छोड़कर सभी धर्मों के परिवारों के लिए तलाक को कोर्ट के जरिए मान्य किए जाने का प्रावधान रखा गया है।
अगर किसी समुदाय में पुनर्विवाह को लेकर ऐसी परंपरा या कुरीति है जो कानून के खिलाफ है, तो उसे रोकने का प्रावधान किया जाएगा।
यानी अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह और तलाक से जुड़े अलग-अलग नियमों के बजाय समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की कोशिश की जा रही है।
शादी की उम्र में कोई बदलाव नहीं
प्रस्तावित कानून के तहत लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष ही रहेगी। यह प्रावधान सभी लागू समुदायों के लिए समान होगा।
इसके साथ ही बहुविवाह को मान्यता नहीं देने की बात कही गई है। विवाह विच्छेद यानी तलाक को कोर्ट के माध्यम से ही मान्यता मिलने का प्रावधान प्रस्तावित है।
विवाह और तलाक का पंजीकरण जरूरी
विधेयक में विवाह और तलाक के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करने का प्रस्ताव है। विवाह या तलाक के पंजीकरण के बाद 15 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना जरूरी होगा।
अगर किसी आवेदन को रजिस्ट्रार खारिज करता है तो उसे इसका कारण भी बताना होगा। आवेदन खारिज होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील कर सकेगा। इस अपील का निस्तारण 60 दिनों के भीतर करने का प्रावधान बताया गया है।
हालांकि, केवल विवाह के पंजीकरण में देरी होने या पंजीकरण नहीं होने से विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा।
पंजीकरण नहीं कराने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना और नोटिस की अनदेखी करने पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं पंजीकरण की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी करने वाले रजिस्ट्रार पर भी 25 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।
बेटा-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार
उत्तराधिकार के मामले में भी प्रस्तावित UCC में बड़ा बदलाव किया गया है। इसके तहत



