राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को सदन का माहौल उस समय गरमा गया जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। हंगामे के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया।
बताया जा रहा है कि डिमांड फॉर ग्रांट्स पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को जानबूझकर दबाया जा रहा है और सदन में बोलने के दौरान माइक तक बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा, “हम यहां बेइज्जती करवाने नहीं आते। यह 200 सदस्यों का सदन है और विपक्ष को बोलने से रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।”
जूली ने यह भी कहा कि एक सदस्य का नाम पुकारे जाने के बाद भी उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष ढंग से नहीं चलाई जा रही और चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष को अधिक समय दिया जा रहा है।
वॉकआउट के बाद बाहर मीडिया से बातचीत में गोविंद सिंह डोटासरा ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन यदि उसे अपनी बात रखने का अवसर ही न मिले तो सदन की गरिमा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान बढ़ा यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
हंगामे के बाद विपक्ष ने रणनीति तय करने के लिए विधायक दल की बैठक बुलाने का फैसला किया है। आज होने वाली इस बैठक में आगे की कार्रवाई और सदन में अपनाए जाने वाले रुख पर चर्चा होगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगेंगे और सदन में अपनी बात मजबूती से रखेंगे।
अब सभी की नजर आगामी कार्यवाही पर है, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन में गतिरोध खत्म होता है या टकराव और बढ़ता है।




