कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय युवाओं की शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि देश का युवा मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से निराश है और उसकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इसी को लेकर इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले छात्रों से सुझाव मांगे जा रहे हैं।
राहुल गांधी के मुताबिक, शिक्षा से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए छात्रों से लगातार बातचीत की जा रही है। उन्होंने अब तक चार बार छात्रों से बातचीत की है। इन बातचीत में छात्रों की पढ़ाई, शिक्षा व्यवस्था, भविष्य और उनसे जुड़ी समस्याओं को समझने की कोशिश की गई।
इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम
इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर तैयारियां चल रही हैं। कार्यक्रम से करीब 8 दिन पहले छात्रों से सुझाव मांगे गए हैं। इसका मकसद यह जानना है कि देश के युवा शिक्षा व्यवस्था में किन बदलावों की जरूरत महसूस करते हैं।
छात्रों से मिले सुझावों के आधार पर शिक्षा से जुड़े मुद्दों को सामने रखने की तैयारी है। राहुल गांधी पहले भी छात्रों के साथ संवाद कर चुके हैं और अलग-अलग मौकों पर युवाओं की समस्याओं को लेकर अपनी बात रखते रहे हैं।
चार बार छात्रों से कर चुके हैं बातचीत
राहुल गांधी ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए अब तक चार बार छात्रों से बात की है। इन बातचीत में छात्रों को अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे रखने का मौका मिला।
छात्रों से संवाद का यह तरीका इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शिक्षा व्यवस्था को लेकर नीतियां बनाने में छात्रों की वास्तविक परेशानियों को समझना जरूरी है। छात्रों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और वे शिक्षा में किस तरह का बदलाव चाहते हैं, इन सवालों के जवाब बातचीत के जरिए सामने आ सकते हैं।
शिक्षा व्यवस्था से युवा क्यों निराश?
राहुल गांधी ने भारतीय युवाओं की शिक्षा व्यवस्था को लेकर निराशा की बात कही है। आज बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर और भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं। पढ़ाई के साथ रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल और बेहतर अवसरों से जुड़े सवाल भी युवाओं के सामने रहते हैं।
छात्रों का कहना है कि शिक्षा सिर्फ डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें ऐसी पढ़ाई चाहिए जो आगे नौकरी, व्यवसाय और दूसरे करियर विकल्पों में भी मदद करे।
इसी तरह शिक्षा की गुणवत्ता, फीस, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और युवाओं को मिलने वाले अवसर जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहते हैं।
छात्रों से सुझाव लेकर आगे बढ़ने की तैयारी
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले छात्रों से सुझाव मांगने का उद्देश्य शिक्षा से जुड़े मुद्दों को सीधे युवाओं की नजर से समझना बताया जा रहा है। इसमें छात्र अपनी समस्याओं के साथ-साथ यह भी बता सकते हैं कि उन्हें शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव चाहिए।
राहुल गांधी का छात्रों के साथ संवाद पहले से ही जारी है। चार बार बातचीत करने के बाद अब इंदौर के कार्यक्रम में युवाओं की आवाज को और व्यापक तरीके से सामने लाने की कोशिश की जा रही है।



